शहर में सफाई के नाम पर जनता के पैसे की सफाई हो रही है। शहर की सड़कों डिवाइडरों के किनारों और पटरियों से धूल साफ करने के लिए 30 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई स्वीपिंग मशीन महीने में सिर्फ एक बार ही वीआईपी सड़कों पर चलती है, जबकि कागजों पर यह रोज चलती है। नगर निगम पर यह आरोप लगाते हुए नगर निगम कार्यकारिणी के पूर्व उप सभापति कुलदीप पांडेय ने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र लिखा है और पूरे मामले की जांच की मांग की है।
पत्र में कहा है कि अगर यह मशीन जितनी कागजों में चलती है उतनी ही सड़कों पर चल जाए तो यह शहर डस्ट फ्री हो जाए। इस मशीन के नाम पर लाखों रुपये के डीजल का घपला चल रहा है। उन्होंने कहा है कि शहर में विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में जांच कर ली जाए। अगर यह मशीन चल रही है तो उसके फुटेज कैमरे में भी कैद होंगे। उन्होंने कहा कि नगर निगम अफसर जानबूझ कर इस मशीन को सड़कों पर नहीं चलवा रहे हैं।
जानबूूझ कर सकर मशीन नहीं खरीदी जा रही
नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति रहे कुलदीप पांडेय ने कहा कि सुपर सकर मशीन की खरीद में नगर निगम जानबूूझ कर रुचि नहीं ले रहा है। अगर यह मशीन आ गई तो नाला सफाई के काम में होने वाली काली कमाई का खेल खराब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि नाला सफाई में गैंग लगाए जाते हैं। ठेके दिए जाते हैं। इनमें मौके पर कम लोग होते हैं, जबकि कागजों पर आदमी ज्यादा दिखाए जाते हैं। मशीन के आने पर नाले से सीधे सिल्ट खींची जा सकेगी साथ ही गंदगी भी नहीं होगी, लेकिन इस ओर रुचि नहीं ली जा रही है।