ब्लॉक हाथरस में बाल पोषाहार के तहत चने की दाल वितरण के घोटाले में अब अफसर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से दाल प्राप्ति के प्रमाण पत्रों को लेने जुट गए हैं। हालांकि सात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विगत में दाल प्राप्ति न होने के प्रमाण पत्र दिए थे। जांच में सामने आ चुका है कि सभी स्वयं सहायता समूहों में एक ही फर्म गायत्री फूड से दाल की खरीद के बिल लगाए गए हैं। अब इस मामले में ब्लॉक स्तरीय अधिकारी जांच कर मामले को निपटाने में लग गए हैं।
वर्ष 2020 में बाल पोषाहार के तहत आंगनबाड़ी केंद्र के लाभार्थियों को दाल वितरण करने के लिए शासन की ओर से धनराशि स्वयं सहायता समूहों के लिए दी गई थी। ब्लॉक हाथरस में कई स्वयं सहायता समूहों के खातों में से धनराशि की निकासी की गई है। यहां तक कि धनराशि एक खाते से दूसरे खाते में डालकर मनमाने तरीके निकालकर बंदरवाट किया गया। केंद्रों के लाभार्थियों को दाल वितरित नहीं की गई। जांच में यह भी उजागार हुआ है कि एक ही फर्म से जिले भर में लाखों रुपये की दाल की खरीद बिना टेंडर प्रकिया अपनाए की गई।
टेंडर प्रकिया से खुद को बचाने के लिए सिंगल विंडो खरीद होने के बाद छोटे-छोटे बिलों में उक्त फर्म को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद डीसी एनआरएलएम अशोक कुमार ने उसी ब्लॉक को जांच का जिम्मा सौंपा हैं, जिस ब्लॉक में यह घोटाला हुआ है। उन्होंने बताया कि बीडीओ द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि अब आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्यकर्ताओं से दाल प्राप्ति के प्रमाण पत्र एकत्रित किए जा रहे हैं। हालांकि घोटाले में शामिल ग्राम पंचायतों की सात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दाल प्राप्त न होने के विगत में भी प्रमाण दिए थे। अब उन कार्यकर्ताओं से फिर प्रमाण पत्र लिए जा रहे हैं।