गैर मुस्लिम छात्रों को रमजान के महीने में नाश्ता एवं भोजन से वंचित रखने के मामले को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। मंत्रालय ने एएमयू अधिकारियों को फोन कर इस संबंध में लिए गए निर्णय से अवगत कराने का निर्देश दिया है। एएमयू प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। सभी हॉलों के प्रवोस्ट को रोजा न रखने वाले छात्रों को उनकी मांग पर नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
रमजान में एएमयू के लड़कों के हॉस्टल के भोजनालय (डायनिंग) में सुबह का नाश्ता एवं दोपहर का खाना नहीं बनता है। रोजेदारों को ध्यान में रखते हुए यह परंपरा एएमयू में इसकी स्थापना काल से ही चली आ रही है। गत दिनों कुछ गैर मुस्लिम छात्रों ने सोशल मीडिया में इस मामले को उठाया कि रमजान के महीने में गैर मुस्लिम छात्रों को एएमयू में नाश्ता एवं भोजन नहीं दिया जाता है।
भाजपा एवं आरएसएस से जुड़े संगठनों के नेताओं ने यह आरोप भी लगा दिया कि एएमयू में हिंदू छात्रों को जबरन रोजा रखने पर मजबूर किया जा रहा है। उसके बाद से इस मसले को लेकर तूफान मच गया है। मंगलवार को ही एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने मांग के आधार पर रोजा न रखने वाले छात्रों को नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बुधवार को पब्लिक रिलेशन कमेटी की बैठक बुलाकर निर्देश दिए गए। प्रवोस्ट को निर्देशित किया गया है कि वह छात्रों के कहने पर नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराएं। हालांकि दिलचस्प पहलू यह है कि बुधवार शाम तक लिखित रूप में एक भी छात्र ने नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने का आग्रह नहीं किया है। एएमयू जनसंपर्क कार्यालय के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि जरूरी नहीं कि छात्र लिखित रूप से ही नाश्ते एवं भोजन की मांग करे। वह मौखिक रूप से भी प्रवोस्ट से कहेंगे तो उन्हें नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
एएमयू के समस्त हॉलों के डायनिंग में रमजान माह में ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रारंभ होने तक छात्रों की मांग के अनुसार लंच परोसा जाएगा। विश्वविद्यालय की यह परंपरा रही है कि रमजान के दौरान उन सभी आवासीय छात्रों को लंच परोसा जाता है जो कि दोपहर के भोजन की मांग करते है। - प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी, जनसंपर्क कार्यालय
मांग पर भोजन उपलब्ध कराने की घोषणा हवा-हवाई है। गैर मुस्लिम छात्रों के लिए छात्रावास में भोजन अनिवार्य रूप से बनना चाहिए। समय काटने के लिए एएमयू प्रशासन लोगों को भ्रमित कर रही है। प्रशासन का उद्देश्य किसी तरह समय काटना है। पांच जून से एएमयू में छुट्टियां शुरू हो रही हैं। - डॉ. पुष्पेंद्र पचौरी, प्रदेश उपाध्यक्ष एबीवीपी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट
एएमयू प्रबंधन ने कहा है कि कैंपस स्थित हॉस्टल में हिंदू छात्रों को खाना न मिलने पर कोई विवाद नहीं है। छात्रों की मांग पर उनकी पसंद का खाना हॉस्टल मेस या उनके रूम में जहां कहेंगे, उपलब्ध करवाया जाएगा। इस विवाद पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एएमयू से रिपोर्ट मांगी थी। इस पर विवि प्रबंधन ने कहा है कि पहली बार रमजान में यह विवाद सामने आया है। एएमयू पीआरओ कार्यालय के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने अमर उजाला को बताया कि मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी गई है। कोई विवाद था ही नहीं। 1920 में विवि की स्थापना हुई। तब से आज तक हिंदू छात्र भी भाईचारा दिखाते हुए सौहार्द से रहते हैं। सहरी के दौरान रोजा रखने वाले छात्रों को जो भी खाने को दिया जाता है, वही हिंदू छात्रों को भी उपलब्ध करवाया जाता था। हालांकि हिंदू छात्र खाना हॉस्टल मेस की बजाय अपने कमरे में ही मंगवा लेते थे। गर्ल्स हॉस्टल में हमेशा खाना मिलता है। कैंपस स्थित डॉक्टर हॉस्टल मेस में भी खाना टाइम से मिल रहा है।
डीएस कॉलेज के गेट पर इंतजामिया का पुतला फूंका
अलीगढ़। महानगर के विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने डीएस कॉलेज गेट पर प्रदर्शन कर एएमयू इंतजामिया का पुतला दहन किया। इसका नेतृत्व धर्म जागरण समन्वय के महानगर सह संयोजन सौरभ चौधरी एवं हिंदू जागरण मंच के युवा वाहिनी के प्रदेश मंत्री संजू बजाज ने किया। सौरभ चौधरी ने आरोप लगाया कि एएमयू प्रशासन हिंदू छात्रों को रोजा रखने पर मजबूर कर रहा है, जो बर्दाश्त से बाहर है। संजू बजाज ने कहा कि एएमयू में अलगाववादी सोच से भरे लोगों का जत्था पनप रहा है। वे लोग जल्द ही मानव संसाधन विकास मंत्री से समय लेकर मुलाकात करेंगे और एएमयू प्रशासन पर कार्रवाई की मांग करेंगे। प्रदर्शनकारी छात्रों में ललित राघव, संजय भीलवाड़ा, विनोद राजपुत, अमर कुमार, लेविश बघेल, अर्जुन, नितिन, विष्णु सिंह, सर्वेश, संजीव वार्ष्णेय, मनोज, कपिल, विकास चंद्र, विशाल, आकाश शर्मा आदि शामिल थे।