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देरी से पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों ने बसों में की तोड़फोड़

Wed, 21 Oct 2015 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गंगीरी/अतरौली
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इन ग्रामीणों के साहस को सलाम। बेशक चार लोगों की जान नहीं बच पाई। मगर इन लोगों ने मौत को मात देते हुए कइयों की जान बचा ली। आलम यह हुआ कि कासगंज के गांव बांसी और बड़ागांव के श्रद्धालुओं से भरा ट्रैक्टर पलटते देख प्रत्यक्षदर्शियों के शोर पर आनन-फानन आसपास के हजारों ग्रामीण का सैलाब मौके पर उमड़ पड़ा।
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नहर में डूबे बच्चों और बड़ों को हाथों-हाथ खींच लिया गया। वह तो पेट में पानी जाने से शुरुआती दौर में में अधिकांश श्रद्धालु बेसुध पड़े थे सो 11 मौत की खबर उड़ गई। यह सुन पुलिस प्रशासनिक अमले के भी पसीने छूटे। मगर अस्पताल पहुंचने पर सभी को इलाज के बाद बचा लिया गया। हालांकि आधा दर्जन की हालत अभी बेहतर नहीं हैं, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। इनको देर रात मेडिकल कॉलेज शिफ्ट किया गया है।

वाकया कुछ इस तरह हुआ कि ट्रैक्टर नरौरा गंगा से निकली हजारा नहर की पटरी पर सांकरा से इन श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर-ट्राली चढ़ी तो गांव लहरा के पास एकाएक यह नहर में जा पलटी। कुछ राहगीर व खेतों में काम कर लौट रहे लोगों ने यह मौत का मंजर आंखों से देखा तो वह चीख पड़े और बचाव की मुद्रा में खुद दौड़ते हुए ग्रामीणों को बुलाने लगे। ग्रामीणों पर जैसा बन पड़ा किया। सूचना थाना व तहसील मुख्यालय को भी दे दी गई। मगर पुलिस प्रशासनिक टीम को पहुंचते-पहुंचते देर हो गई। बस इस पर ग्रामीणों का गुस्सा भड़का और कुछ बसों के शीशे तक तोड़ दिए।
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हंगामा भी किया। इसकी दूसरी वजह यह थी कि नहर पटरी को लोग घायलों को निकालकर वहां लिटाने के प्रयोग में ले रहे थे। वाहन रुक नहीं रहे थे। उन्हें रोकने के लिए भी ग्रामीणों को हंगामा व गुस्से का रुख अख्तियार करना पड़ा। हालांकि एसडीएम व एसओ दादों के      साथ-साथ एसओ पाली, एसओ अतरौली, एसओ छर्रा भी पहुंच गए और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। बाद में एडीएम ई, एसपीआरए, के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंच गए।
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