अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल के अनुसार इस मामले में कुल 13 गवाह हुए। वादी चश्मदीद श्यामवीर ने गवाही दी। दूसरे चश्मदीद गवाह घायल हुए कुलदीप को भी बुलाया गया था। हालांकि, उसने किन्हीं कारणों से आत्महत्या कर ली। यह तथ्य रखा गया कि वह दबंग आरोपियों के दबाव में डिप्रेशन में था। इसलिए उसने आत्महत्या कर ली। इसके अलावा पुलिस द्वारा संकलित किए गए साक्ष्य, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, अभियुक्तों से बरामद असलहों, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सजा सुनाई गई है।
कमांडो की पत्नी के भाई बने एसएसपी, आज भी बांधती है राखी
कमांडो तेजवीर की हत्या के विरोध में अगले दिन मुरवार पर कई घंटे जाम लगा था। भीड़ ने कार्रवाई को लेकर डीएम एसएसपी को बुलाने की मांग रखी। तत्कालीन एसएसपी वर्तमान में डीआईजी देवीपाटन अमित पाठक वहां पहुंचे। उन्होंने कमांडो के भाई श्यामवीर व पत्नी पिंकी से बात की। पिंकी को उन्होंने यूपी पुलिस के अधिकारी व खुद एक भाई के रूप में समझाया कि कठोर कार्रवाई होगी।
इस पर उसी समय भीड़ में पिंकी ने अमित पाठक को धागा बांधकर अपना भाई बनाया। साथ में यह भरोसा लिया कि आप व आपकी पुलिस हमेशा उसके परिवार के साथ रहेगी। इसके बाद से अमित पाठक को आज तक पिंकी प्रतिवर्ष राखी बांधने जाती हैं। पिंकी ने अमित पाठक का न्याय मिलने पर आभार जताया है। वर्तमान में पिंकी अपने पति की जगह एसएसबी में जॉब कर रही हैं। दो बच्चों को लेकर लखनऊ में रहती हैं। वहीं निर्णय पर अब तक मुकदमा लड़ते आए भाई श्यामवीर ने भी अदालत व पुलिस का आभार जताते हुए कहा है कि लंबे समय बाद न्याय मिला है।