नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुआ रहीं और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि वर्ष 2020 में जो एनपीआर लागू होगा, वह गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से एनआरसी का पहला कदम होगा। वह रविवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज में रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से सीएए, एनआरसी व एनपीआर के विरोध में आयोजित सभा में बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि देश में टुकड़े-टुकड़े में जो आंदोलन हो रहा है, उससे वह खुश हैं, क्योंकि एकजुट करने का काम जो वह खुद और आंदोलन से नहीं कर पाईं, उसको पीएम मोदी ने कर दिखाया। मेधा ने कहा कि जेएनयू को रण का मैदान बना दिया गया, जिससे सर्व शिक्षा अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। सबका साथ, सबका विकास का नारा झूठ साबित हो रहा है। वह राष्ट्रीय जन आंदोलन के लिए धन्यवाद देती हैं। कहा कि एएमयू के बाब ए सैयद पर जो घटना हुई है, वह खतरनाक तो है ही, उससे भविष्य में भी खतरा है। जिस एएमयू के मॉरिसन कोर्ट हॉस्टल पर आज तक कोई नहीं पहुंचा, वहां पर हमला कर दिया गया। यह हिंसा का नंगा नाच है।
राज्य और शासन के इशारे पर एनकाउंटर व हमला होता है, जिसका वह धिक्कार करती हैं। धर्म को अधर्म की दिशा में ले जाने वाले ये कौन होते हैं। अगर वह धार्मिक होते तो कभी हिंसा का समर्थन न करते। अपनी सेना को जामिया के हास्टल तक पहुंचाने वालों ने न सिर्फ महिलाओं, बल्कि सच्चे नागरिक का अपमान किया है। आजादी के आंदोलन में जिन्होंने भारत से चले जाओ का नारा दिया था, वह यूसुफ थे। मुस्लिमों को पाकिस्तान जाने से रोका वह मौलाना अबुल आजाद थे। एक-एक जगह की संपदा हासिल करने में लोग लगे हैं।
पर्यावरण में कानून बदल रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून बना दिया। इससे साबित हो चुका है कि कितना फर्क करें, सीएए व एनसीआर में, वह एक ही हैं। सीएए सेक्शन-2 में छह धर्मों को ले लिया, लेकिन मुस्लिमों को भुला दिया है, तो खुद समझ सकते हैं। एनपीआर वर्ष 1987 वाला नहीं है। वर्ष 2003 के नियम बीच के सरकारों ने नहीं थोपे थे, वह मोदी सरकार थोपने जा रही है। मेरे पास भी माता-पिता के डॉक्यूमेंट नहीं है। एक साजिश है, विभाजन की है। वोट बैंक साधने की बातें चल रही हैं। जितनी परेशानी नोटबंदी में नहीं हुई, उससे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने मुजफ्फर नगर सहित कई घटनाओं की फाइंडिंग रिपोर्ट पर बातें कीं। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद हमजा, डॉ. सलीम आदि मौजूद रहे।
गृहमंत्री शाह अपना नाम बदलें : इरफान
इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि सीएए, एनआरसी से गरीब और नेपाल के लोग परेशान होंगे। यह मुसलमानों पर नहीं, गरीबों पर हमला है। आरएसएस की स्थापना हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हुई थी। ऐसा नहीं है, बल्कि मुसलमानों पर हमला करने के लिए हुई थी। किसी भी किताब में 13वीं शताब्दी से पहले हिंदुत्व शब्द नहीं है। सावरकर ने हिंदुत्व का किस्सा शुरू किया था। 1922 के बाद सावरकर ने अंग्रेजों के खिलाफ कुछ नहीं बोला। टू नेशन थ्योरी सावरकर की देन है। उन्होंने कहा कि गांधी की हत्या में सावरकर के खिलाफ अपील होती, तो सजा मिलती है। ऐसे व्यक्ति को रहनुमा मानते हैं। अब भारत रत्न की तैयारी हो रही है। गोलवलकर ने कहा था कि मुस्लिमों को कोई अधिकार नहीं होगा। गृहमंत्री के नाम के आगे शाह है, शाह अरबी शब्द है, इसलिए वह नाम बदल दें। इरफान हबीब ने गांधी जी का ऐनक शौचालय पर दिखाने से फायदा नहीं होगा, बल्कि उनके बताए रास्तों पर चलने से फायदा होगा। गोडसे को देशभक्त कहने वाले गांधीजी की बात क्यों सुनेंगे। यह आंदोलन सभी वर्गों का है।
फांसी की सजा के बजाय मिले आजीवन कारावास : पाटकर
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि 146 देशों में फांसी की सजा पर रोक है। मगर, हमारे देश में फांसी की सजा आज भी हो रही है। इस पर रोक लगनी चाहिए। उन्नाव की एक बेटी से दुष्कर्म करने वाले कुलदीप सेंगर को फांसी की सजा नहीं मिलती, लेकिन हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म करने वाले का एनकाउंटर कर दिया जाता है और निर्भया के साथ दुष्कर्म व मारने वाले चार लोगों का फांसी की सजा सुना दी जाती है।
गिरफ्तार चंद्रशेखर आजाद को करें रिहा : आयशा
जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा आयशा ने कहा कि जो इन दिनों जामिया, जेएनयू व एएमयू में छात्र-छात्राएं आंदोलित हैं, वही देश की नई दिशा तैयार करेंगे। योगी सरकार एएमयू के छात्रों को फर्जी मुकदमे में फंसा रही है। गिरफ्तार भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद को योगी सरकार रिहा करे।
नफरत एक बीमारी है : फैसल
सोशल एक्टिविस्ट फैसल खान ने कहा कि नफरत एक बीमारी है। इससे देश का नुकसान होता है। रामराज्य में नफरत व गैर बराबरी नहीं हो सकती है। एनआरसी के दौरान गरीब तबके के लोग अपनी पहचान नहीं दिखा पाएंगे। 150 पैसेंजर ट्रेनें बेच दी र्गईं, लेकिन इस पर कोई बात करने को तैयार नहीं है।
मजहबी नारों से बनाएं दूरी : आरफा
वरिष्ठ पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने कहा कि कानूनी तरीके से गैर जरूरी कानून बनाए जा रहे हैं। जामिया, जेएनयू व एएमयू के विद्यार्थियों ने अपने आंदोलन से प्रधानमंत्री मोदी को धकेला है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में मजहबी नारेबाजी से गुरेज करना चाहिए। अपनी विचारधारा कायम रखिए, पर रणनीति बदलिए। यही मौका और दस्तूर है। सभी धर्मों के लोगों को अपने आंदोलन से जोड़ें।
छात्रों का साथ दें शिक्षक : सलमान
एएमयू छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष सलमान इम्तियाज ने कहा कि छात्रों का साथ शिक्षक दें वरना वो भी पूर्व शिक्षक घोषित कर दिए जाएंगे। जैसे विद्यार्थियों ने प्रो. तारिक मंसूर को पूर्व कुलपति, अब्दुल हमीद को पूर्व रजिस्ट्रार मान लिया है। उन्होंने कहा कि सभी वर्ग के विद्यार्थियों को अपने आंदोलन से जोड़ेंगे।
फैज की नज्म ‘हम देखेंगे’ गूंजी
एएमयू में इतिहास के छात्र सैफुल्ला हैदर ने फैज अहमद फैज की नज्म ‘हम देखेंगे...’ सुनाई। सैफुल्ला ने एक कविता भी सुनाई।