रोबोटिक मशीन से सीवर लाइन की सफाई करते नगर निगम कर्मचारी
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केंद्रीय बजट में मैनहोल की सफाई के लिए मानव प्रवेश प्रतिबंध के बाद नगर आयुक्त के स्तर से साफ कर दिया गया है कि अब सिर्फ रोबोटिक मशीनों से सीवर की सफाई होगी। नगर निगम के पास 88 लाख रुपये कीमत की दो मशीनें हैं, जिनके कुछ समय पहले ट्रायल पूरे हुए हैं। इसके बाद से इनके जरिये ही सफाई का काम जारी था। मगर जरूरत पर कर्मचारी को प्रवेश कराकर मैनहोल भी साफ कराया जाता था। मगर बजट में निर्देश आने के बाद इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नगर निगम के मीडिया सहायक के अनुसार यह सही है कि कुछ समय पहले तक पूरी तरह से नगर निगम कर्मचारी पर सीवर व मैनहोल की सफाई के लिए आश्रित था। मगर नगर निगम द्वारा 44-44 लाख रुपये की दो मशीन खरीद ली गई हैं। इनका ट्रायल भी कर लिया गया है। खुद नगर आयुक्त की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि अब मैनहोल में कर्मचारी को प्रवेश कराकर कतई सफाई नहीं होगी। हर जगह पर मशीन के जरिये ही सफाई कराई जाएगी।
नगर निगम में अब तक 60 किमी लंबी सीवर लाइन है, जबकि 70 किमी लंबी लाइन स्मार्ट सिटी द्वारा तैयार की जा रही है। इसके बाद से मशीन का काम और बढ़ जाएगा। हमारे पास मौजूद मशीनें 30 फिट गहरे सीवर में और किसी भी संकरी या तंग गली में जाकर सीवर व मैनहोल की सफाई कर सकेगी।
मैनहोल की सफाई मशीन से कराए जाने को बताया धोखा
बजट में मैनहोल की सफाई मशीनों से कराए जाने को सफाई कर्मचारियों के नेताओं ने धोखा बताया है। यह कर्मचारियों के लिए खाली डिब्बा, खाली बोतल है। स्थानीय निकाय सफाई मजदूर उत्तर प्रदेश के प्रांतीय महामंत्री बिल्लू चौहान ने कहा कि सरकार ने मैनहोल में सफाई कर्मचारियों को न उतराने के लिए कहा है। जहां जगह है, वहां मशीनों से सफाई हो जाएगी, लेकिन संकरी गलियों और सड़कों पर मशीन नहीं जा पाएगी। ऐसे में मैनहोल में कर्मचारियों को सफाई करनी होगी, जो सरकार का फैसला धोखा देने वाला है।
बजट में सफाई कर्मचारियों के लिए खाली डिब्बा, खाली बोतल है। नगर सफाई मजदूर संघ नगर निगम के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने कहा कि बजट में सफाई कर्मचारियों से साथ धोखा और अन्याय है। सीवर में कर्मचारियों को न उतारना कोई उपलब्धि नहीं है। 70 साल से सफाई कर्मचारी द्वारा ही साफ किया जा रहा है। सरकार को उनके भविष्य चिंता है तो वह उनके विकास के लिए अलग से वेतन सृजित करे। नगर सफाई मजदूर संघ नगर निगम महामंत्री राधेलाल धूरी ने कहा कि सीवर में घुसने से हजारों सफाई कर्मचारियों की मृत्यु हो गई, लेकिन सरकार ने बड़े मुआवजे की घोषणा नहीं की। सीवर के नाम पर सफाई कर्मचारियों के साथ उपेक्षा की जा रही है।