जहरीली शराब कांड में 108 लोगों की जान जाने के बाद अब शासन जागा है। मिथाइल अल्कोहल पर नियंत्रण के संबंध में आदेश जारी किया है। डीएम को लाइसेंस अधिकारी बनाया है। मजिस्ट्रेट, पुलिस, राजस्व, मेडिकल और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें इसके क्रय-विक्रय पर नियंत्रण करेंगी। लाइसेंस के लिए अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं। फिलहाल, जिले में एक भी लाइसेंस जारी नहीं है।
जहरीली शराब के सेवन से 108 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने जांच कराई तो उसे बनाने के लिए मिथाइल अल्कोहल का प्रयोग किए जाने की पुष्टि हुई। वरदान इंक एंड सॉल्वेंट फैक्टरी, तालानगरी से 12600 लीटर की बरामदगी भी हुई। इसी फैक्टरी से केमिकल को जहरीली शराब बनाने के लिए बेचा गया था। इसके क्रय-विक्रय, इस्तेमाल के नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े हुए तो अधिकारी अपना बचाव करते दिखे। आबकारी विभाग से लेकर मेडिकल और ड्रग विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया। अब शासन ने इसके संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन जारी की हैं।
विषाक्त अधिनियम में शामिल
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि मिथाइल अल्कोहल एक विष है। इसे रखने, क्रय-विक्रय को नियंत्रित करने के लिए विषाक्त अधिनियम 1919 के अंतर्गत उप्र विषाक्त नियमावली 1994 के तहत अनुज्ञापन/परमिट, लाइसेंस प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) को बनाया गया है। लाइसेंस की अलग-अलग श्रेणियों के विषय में डीएम ने बताया कि एमए-1 अनुज्ञापन मिथाइल अल्कोहल उत्पादन करने वाले उद्योगों के लिए, एमए-2 मिथाइल अल्कोहल की थोक बिक्री के लिए, एमए-3 मिथाइल अल्कोहल की फुटकर बिक्री के लिए, एमए-4 मिथाइल अल्कोहल को क्रय, प्रयोग एवं बिक्री के लिए, एमए-5 मिथाइल अल्कोहल क्रय करने के परमिट के लिए, एमए-6 मिथाइल अल्कोहल के परिवहन एवं आयात के परमिट के लिए, एमए-7 मिथाइल अल्कोहल के परिवहन एवं निर्यात के परमिट के लिए, एमए-8 अनुज्ञापियों द्वारा मिथाइल अल्कोहल की प्राप्ति, उपभोग एवं बेचे गए मिथाइल अल्कोहल के लेखे के रजिस्टर के लिए, एमए-9 अनुज्ञापियों द्वारा प्राप्त मिथाइल अल्कोहल की मासिक विवरणी के लिए प्रयोग किया जाता है।
राजपत्रित अधिकारियों को कार्रवाई का अधिकार
डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि नियमावली के अधीन उक्त अनुज्ञापियों द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टरों एवं उसके निरीक्षण के लिए मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, राजस्व अधिकारी, मेडिकल ऑफिसर आदि के अतिरिक्त आबकारी विभाग के निरीक्षक या उससे बड़ा अधिकारी या उद्योग विभाग के निरीक्षक या उससे बड़े अधिकारी अधिकार प्रदान किए गए हैं। मिथाइल अल्कोहल को कब्जे में रखने व विक्रय करने के संबंध में अभी तक जिले में एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। अगर, कोई व्यक्ति इसका भंडारण या क्रय-विक्रय करता पाया गया तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा होगा।