वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) टीम अब छोटी फर्मों की जांच नहीं करेंगी। ये टीमें केवल चुनिंदा फर्मों में ही बड़ी कर चोरी की गहन जांच करेंगी। एसआईबी जांच से पूर्व गहन डाटा विश्लेषण के नये मानकों का निर्धारण किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, जीएसटी पोर्टल, ईवे बिल पोर्टल एवं विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध डाटा में से प्रति माह बड़े टर्नओवर की अलग-अलग श्रेणी के दस व्यापारियों के डाटा का विश्लेषण किया जाएगा।
डाटा विश्लेषण की आनलाइन कंप्यूटराइज्ड व्यवस्था की जा रही है, जिसके लिए सख्त मानक तय किए गए हैं। उस मानक के अनुरूप ही डाटा विश्लेषण कर जांच के लिए उपयुक्त फर्म का चयन किया जाएगा। ये पूरी प्रक्रिया आनलाइन होने से और पारदर्शी होगी। प्रति माह ऐसा डाटा विश्लेषित करने के बाद उन फर्मों की जांच होगी। यही नहीं, गंभीर प्रकृति के मामलों में हर तिमाही में ऐसी चार प्रमुख जांच ही की जाएंगी। नई व्यवस्था हाल ही में सितंबर के पहले पखवाड़े में लागू हुई है, अधिकारियों का दावा है कि इससे जांच गुणवत्ता बहुत उच्च होगी।
गौर हो कि पहले की व्यवस्था में उक्त डाटा से रैंडम फर्म का चयन कर उसकी जांच की जाती थी। जिसमें कई बार कम टर्नओवर वाले व्यापारी भी जांच की जद में आ जाते थे। जिससे अपेक्षाकृत बड़ी कर चोरी नहीं पकड़ी जा पा रही थी। गौर हो कि कई व्यापारिक संगठन लगातार विशेष अनुसंधान शाखा की जांच और कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, जिसका कारण छोटी फर्मों की जांच होना था। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था का विरोध कम होगा, क्योंकि इसमें जांच करने का आधार बहुत मजबूत होगा।
एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड वन विनय अस्थाना ने बताया कि प्रदेश की वाणिज्य कर आयुक्त अमृता सोनी ने स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसमें डाटा का गहन अध्ययन करने के बाद आनलाइन सिस्टम से कुछ फर्म चुनी जाएंगी। उन्हीं फर्म का डाटा चेक होगा। इसके बाद फर्म चुनी जाएगी और उसकी जांच होगी। छोटे टर्नओवर वाली फर्म इसमें नहीं आएंगी। इसलिए इसका विरोध करना उचित नहीं है।
एसआईबी जांच का आंकड़ा
1-प्रदेश में कुल 45 एसआईबी टीमें
2-वर्ष 2017-18 में 2177 जांच हुईं
3-वर्ष 2018-19 में 2751 जांच हुईं
4-वर्ष 2019-20 में 1749 जांच र्हुइं