परिवहन विभाग ने एक फरवरी से नई व्यवस्था लागू करते हुए 7500 किलो क्षमता से कम भार वाले वाणिज्यिक वाहनों पर वन टाइम रोड टैक्स की सुविधा शुरू कर दी है। अब ऐसे वाहन मालिकों को व्यक्तिगत वाहनों की तरह एकमुश्त टैक्स जमा करना होगा, जिसके बाद उन्हें 15 वर्षों तक अलग से रोड टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
अब तक छोटे-बड़े लगभग सभी वाणिज्यिक वाहनों को त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर रोड टैक्स जमा करना अनिवार्य था, जिससे वाहन मालिकों को बार-बार विभागीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने से छोटे वाहन संचालकों को प्रशासनिक झंझट और समय की बचत होगी।
माना जा रहा है कि वन टाइम टैक्स की दरें लगभग चार साल के टैक्स के बराबर निर्धारित की गईं हैं, जिससे सरकार को भी राजस्व मिलेगा और वाहन मालिकों को दीर्घकालिक राहत मिल सकेगी।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद का कहना है कि इस नई नीति का उद्देश्य छोटे व्यवसायियों, डिलीवरी वाहनों, लोडर, छोटे मालवाहक और स्थानीय परिवहन से जुड़े लोगों को सहूलियत देना है। इससे छोटे कारोबारियों के लिए वाहन संचालन की लागत और कागजी प्रक्रियाएं सरल होंगी।
7500 किलो से अधिक भार वाले वाहनों के लिए पुरानी व्यवस्था
नई व्यवस्था में अभी भी 7500 किलो से अधिक भार क्षमता वाले भारी वाणिज्यिक वाहनों पर पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी और उन्हें पहले की तरह त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर रोड टैक्स देना होगा। इसमें पैसेंजर वाहन में प्रति यात्री के हिसाब से कर निर्धारित है, जबकि माल वाहक में प्रति टन के हिसाब से त्रैमासिक व वार्षिक कर की व्यवस्था है।
यह है नया परिवर्तन
यान का विवरण
एकमुश्त कर की दर
-भाड़े या पारिश्रमिक दो पहिया वाहन
यान के मूल्य का 12.5 फीसदी
-तिपहिया मोटर कैब
यान के मूल्य का 07 फीसदी
-10 लाख तक के मोटर व मैक्सी कैब
यान के मूल्य का 10.5 फीसदी
-10 लाख से ऊपर के मोटर व मैक्सी कैब
यान के मूल्य का 12.5 फीसदी
-संनिर्माण उपस्कर यान विशेष प्रयोजन यान
यान के मूल्य का 06 फीसदी
-3000 किग्रा भार से अधिक सकल यान
यान के मूल्य का 03 फीसदी
-3000 से 7500 किग्रा तक
यान के मूल्य का 06 फीसदी