अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
मुखबिर पुलिस तंत्र की वह रीढ़ होते थे, जो पेचीदा घटनाओं के खुलासे और बड़े अपराधियों को पकड़वाने में मददगार साबित होते थे। मगर आज मुखबिर भरोसेमंद नहीं रहे। इसके पीछे कई वजहें हैं और इसी के चलते मुखबिरी की जगह अब तकनीक ने ले ली है। चाहे कितनी भी बड़ी घटना क्यों न हो जाए। हर घटनास्थल पर पुलिस सर्विलांस तकनीक और सीसीटीवी का पहले सहारा लेती है। फिर भी अपने जिले में कुछ ऐसी घटनाएं और ऐसे अपराधी हैं, जो आज तक नहीं खुलीं और न अपराधी पकड़े गए, जिसमें असफलता के पीछे कमजोर मुखबिरी बड़ी वजह मानी जाती है।
पुलिस की कार्यशैली पर गौर करें तो पुराने समय से पुलिस को मुखबिरों पर खर्च करने के लिए जिले वार बजट मिलता है, जिसे गुप्त बजट के रूप में थानों में मुखबिरी पर खर्च किया जाता है। इसके अलावा मुखबिर पालने वाले थानेदार अपने स्तर से भी मुखबिरों पर रुपये खर्च करते हैं। मगर जब वर्ष 2000/2001 से तकनीक का दौर शुरू हुआ और पुलिस में बड़ी घटनाओं के खुलासे के लिए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप व सर्विलांस टीम गठित हुई। तब से मुखबिरी पर पुलिस का फोकस कम होने लगा, क्योंकि ज्यादातर घटनाओं के खुलासे में तकनीक बड़ी मददगार बनी। बड़ेे-बड़े अपराधी भी तकनीक की मदद से पकड़े गए।
मुखबिरों से भरोसा टूटने की ये है बड़ी वजह
पुलिस के जानकार बताते हैं, एक समय में पुलिस के मुखबिर सिर्फ दोस्ती में पुलिस वालों के लिए मुखबिरी करते थे। मगर अब ऐसा दौर आ गया है कि जिस मुखबिर पर भरोसा किया जाए, वह पुलिस के लिए काम तो करता है। मगर खुद गलत धंधों में शामिल हो जाता है। इस तरह की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचती हैं। आरोप लगता है कि यह फलां सिपाही, दरोगा या कोतवाल का मुखबिर है। उनकी सरपरस्ती की आड़ में गलत धंधा कर रहा है। फिर शिकंजा उस पुलिस वाले पर कसा जाता है। इसलिए पुलिस ने मुखबिरों से दूरी बनाना शुरू कर दिया।
सिविल लाइंस में लगा था मुखबिरी में हत्या का आरोप
बात ज्यादा पुरानी नहीं, 31 दिसंबर 2017 की रात की है। सिविल लाइंस के जमालपुर में बहार नाम के युवक की हत्या की गई थी। उस समय यह शोर मचा और परिवार ने भी आरोप लगाया था कि बहार पर कुछ अपराधी पुलिस के लिए मुखबिरी करने का शक करते थे। इसलिए उसे मारा गया। उस घटना ने भी मुखबिरों व पुलिस को सबक दिया।
हर घटना पर मिला तकनीकी सुराग
पुलिस के जानकार बताते हैं, अब किसी भी घटनास्थल पर पहुंचने पर बारीकी से जांच करने पर कोई न कोई तकनीकी सुराग मिलता है। अपने जिले की कई ताजा प्रमुख घटनाएं इस बात का उदाहरण हैं।
अकराबाद कांड में मुखबिरी बनी मददगार
अकराबाद में किशोरी की दुष्कर्म की कोशिश में हत्या का मामला मुखबिरी के दम पर खुला था। वहां कुछ ग्रामीणों ने जांच में लगी पुलिस को यह सुराग दिया था कि आरोपी को आखिरी बार यहां से जाते देखा गया है। बस वही घटना के खुलासे का अहम कारण बना।
- आज तक नहीं खुलीं ये पांच महत्वपूर्ण घटनाएं
- फरवरी 2019 में एएमयू के पास निजी कॉलेज के छात्र सैफ की हत्या
- वर्ष 2020 में गैस एजेंसीकर्मी संग सिविल लाइंस में ढाई लाख की लूट
- वर्ष 2020 में समद रोड-रेलवे रोड से कई लाख के मोबाइलों की चोरी
- सितंबर 2020 में डोरीनगर से गोपाल के इकलौते बेटे की अपहरण/हत्या
- वर्ष 2020 में लोधा से युवती के अपहरण में दो जेल गए, युवती नहीं मिली
- ये चार इनामी आज तक फरार
- सऊद अहमद सिद्दीकी निवासी टांडा अंबेडकर नगर। दुर्दांत अपराधी मुनीर का दाया हाथ है। अलीगढ़ की सहित नौ गंभीर घटनाओं में आरोपी। डीजीपी स्तर से 2015 से 50 हजार का इनाम। यूपी का मोस्ट वांटेड।
- विनोद पथैना निवासी पथैना, भरतपुर। फर्नेश कारोबारी सुरेंद्र जिंदल अपहरण कांड में दुर्दांत अपराधी विनोद जाट का दाया हाथ। एडीजी जोन के स्तर से 2020 से 50 हजार का इनाम घोषित।
- अफसर निवासी अतरौली, मूल निवासी पश्चिम बंगाल। अतरौली में 2017/2018 में साधुओं की हत्या में मुख्य आरोपी। दो साथी मुठभेड़ में मारे गए। तभी से इनाम घोषित है।
- पप्पू इतवारी निवासी जहराना, चंडौस। वर्ष 2008 में गांव की किशोरी संग दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोपी। 20 हजार का इनाम घोषित है।
- ये भी जानें
- वर्ष 2019 में पुलिस ने विवेचना निस्तारण अभियान के दौरान हत्या, दहेज हत्या, अज्ञात की हत्या जैसे उन मुकदमों का निस्तारण किया, जिनको लेकर पिछले तीन-चार साल में कोई सुराग नहीं मिले और नामजदों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। वर्ष 2019 में ऐसे 36 मुकदमों में न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई है। इनमें हत्या के अज्ञात में सात मुकदमे, दहेज हत्या के 13 व हत्या में नामजद के 16 मुकदमे शामिल हैं।
बनाए जाएंगे डिजिटल और प्राइवेट मुखबिर : एसएसपी
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने स्वीकारा है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र पहले के दौर की अपेक्षा कमजोर हो रहा है। उन्होंने बताया कि अब जिले में डिजिटल व प्राइवेट मुखबिर तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा गांव-गांव सरकारी सेवाओं से जुड़े लोगों को भी पुलिस मित्र के रूप में मुखबिर बनाया जाएगा। ये पुलिस को सूचनाएं देने व सहयोग करने का काम करेंगे। डिजिटल मुखबिर व प्राइवेट मुखबिर अपराध को लेकर पुलिस का सहयोग करेंगे।