जेएन मेडिकल कॉलेज में एक सप्ताह में दूसरी बार इमरजेंसी सेवाएं ठप होने के बाद इमरजेंसी या वार्ड में तीमारदारों के प्रवेश के लिए नियम बदल दिए गए हैं। अब पास से ही प्रवेश मिल सकेगा। इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रखने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम की तैयारी शुरू कर दी है।
बुधवार की रात 9:30 बजे मरीज शौकत अली की मौत के बाद उनके परिजनों ने स्टाफ के साथ मारपीट कर दी थी। घटना से आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दीं। करीब सात घंटे तक सेवाएं ठप रहीं। सुबह चार बजे इमरजेंसी सेवा बहाल हो गई। इस दौरान बदायूं, संभल, अलीगढ़ सहित आसपास क्षेत्रों के 32 मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी घटना है जब मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी सेवाएं ठप हुईं। 22 मार्च को जूनियर डॉक्टर और तीमारदारों के बीच मारपीट होने पर 43 घंटे तक इमरजेंसी ठप रहीं। इस तरह की घटनाओं के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में प्राचार्य प्रो. अंजुम परवेज ने बताया कि इमरजेंसी में तीमारदारों के लिए प्रवेश पास सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जूनियर डॉक्टर्स की सुरक्षा अहम : उपाध्यक्ष
रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. अख्तर अली ने बताया कि जूनियर डॉक्टर्स की सुरक्षा अहम है, जिसकी गारंटी आरडीए लेती है। उन्होंने कहा कि जेआर की कमी के चलते मरीजों का दबाव मेडिकल कॉलेज पर पड़ रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ेगी तो डॉक्टरों की भी संख्या बढ़ानी होगी। डॉ. अख्तर ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षाकर्मियों की संख्या कम है।