रविवार को देश की संसद में पेश हुए आम बजट में आम आदमी के लिए कुछ खास नहीं था। नौकरीपेशा लोगों को कुछ भी नहीं दिया गया है। वहीं आम आदमी की राहत के लिए तो बजट में कुछ भी खास नहीं है। यह कहना है शहरवासियों का।
अमर उजाला ने बजट पर आम लोगों से बात की तो बताया गया कि महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। कोरोना संक्रमण काल की वजह से अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। रोजगार से लेकर कई स्कूल, रेस्टोरेंट और अन्य संस्थान बंद हो गए हैं। आम आदमियों की नौकरियां चली गईं। ऐसे में सरकार को आम आदमी के लिए कुछ न कुछ देना चाहिए था। लोगों का कहना है कि लॉकडाउन में व्यापार ठप्प रहा। कई लोगों को आधी-आधी तनख्वाह मिली हैं, जबकि इसके उलट बिजली बिल, बच्चों को पढ़ाने की फीस, भोजन से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक खर्चा बढ़ा है। ऐसे में सरकार को आम जनता के लिए भी आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी।
आम आदमी के लिए कुछ करने की बजाय तमाम चीजों पर कस्टम ड्यूटी और सेस लगाया गया है। इससे महंगाई और बढ़ेगी। सरकार को कम से कम आम आदमी की थाली सस्ती करने के लिए कुछ नीति बनानी चाहिए थी।
-गोविंद अग्रवाल, मामू भांजा
कोरोना संक्रमण काल में जब पढ़ाई बाधित रही तो बच्चों को मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप दिए गए। जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उन परिवारों में तो एक मोबाइल को कई लोगों ने प्रयोग किया। अब अगर कोई मोबाइल या गैजेट्स खरीदना चाहेगा तो महंगाई की बदौलत अपने हाथ पीछे खींच लेगा।
-प्रीति शर्मा, वसुंधरा एन्कलेव
मध्यमवर्गीय व गरीब लोगों के हितों को इस बजट में कोई जगह नहीं दी गई है, जबकि लोग सबसे ज्यादा राहत मिलने को लेकर आशा लगाए बैठे थे। पर अफसोस कि आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है।
- मोना, स्वर्ण जयंती नगर
कोरोना संक्रमण का सीधा प्रभाव आम आदमी पर पड़ा है। नौकरियां जाने से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति ही गड़बड़ा गई है। आज के दौर में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने से लेकर कपड़े पहनाने और खाना खिलाने तक महंगाई तो बढ़ी ही है। साथ ही कई वस्तुएं आम आदमी की पहुंच से दूर हो गई हैं। ऐसे में आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार को विशेष पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी।
-प्रियंका गोयल, रामघाट रोड