एएमयू के हिंदी विभाग में बुधवार को कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने ‘प्रोफेसर शिव कुमार शांडिल्य शोध कक्ष’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रो. शांडिल्य ने जीवन भर हिंदी विभाग की सेवा की।
अब उनके परिवार ने यह शोध कक्षा स्थापित कर उनकी यादों को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। कुलपति ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में धर्म के आधार पर किसी का प्रवेश नहीं होता। बहुत से लोगों को यह भ्रांति है कि यहां किसी तरह का आरक्षण है। इस विवि के द्वार सभी के लिए खुले हुए हैं।
आर्ट्स संकाय के डीन प्रोफेसर कफील अहमद कासिमी ने कहा कि जब वह 1967 में यहां आए थे, उस समय प्रोफेसर हरवंश लाल शर्मा डीन थे। प्रोफेसर शांडिल्य शिक्षक थे। प्रोफेसर हरवंश लाल शर्मा ओर प्रोफेसर शांडिल्य के परिवार ने हिंदी विभाग में कमरे बनाकर पूरी यूनिवर्सिटी में एक नमूना पेश किया है, जिसकी हमें पैरवी करनी चाहिए।
हम उनके अहसान को स्वीकार करते हैं और उनके योगदान को सराहते हैं। प्रोफेसर आरिफ नजीर ने कहा कि प्रो. शांडिल्य की सारी संपत्ति दूसरों की भलाई के लिए थी। वह बहुत बड़े परोपकारी थे। उनके पुत्र डॉ. संदीप शांडिल्य ने कहा कि वह भाषा के जादूगर थे। मुजफ्फरनगर के एक गरीब परिवार में पैदा हुए और बुग्गी चलाकर घर का पालन पोषण किया और 1997 तक एएमयू से जुड़े रहे। उनके सुपुत्र उदित शांडिल्य ने अपने दादा की याद में एक स्मृति गीत सुनाया।
प्रधानमंत्री से मिलना चाहते हैं कुलपति!
अलीगढ़। एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह भी अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की तैयारी कर रही है। ऐसी चर्चा कैंपस में है। चर्चा तो यह भी है कि एक प्रतिनिधि मंडल के साथ मिलने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से समय मांगा है। इस कमेटी में एक बड़े मुस्लिम धर्म गुरु का नाम भी शामिल है। हालांकि अभी इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।