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भाजपा से लड़ाई नहीं, उनके कई नेता हमारे साथ

Mon, 10 Jul 2017 01:29 AM IST
आशीष निगम
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ठा. जयवीर सिंह - फोटो : Amar Ujala
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सावन के मौसम में जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू पर अविश्वास प्रस्ताव के काले घने बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में उनके चाचा व पूर्व काबीना मंत्री ठा. जयवीर सिंह ने किसी भी तरह से भतीजे नीटू की कुर्सी और अपनी राजनीतिक साख बचाने में पूरी ताकत झोंक दी है।
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पहले रामसखी कठेरिया, फिर चौ. सुधीर सिंह और अब उपेंद्र सिंह नीटू सहित लगातार तीन अध्यक्ष बनाने में सफल रहे ठा. जयवीर सिंह जिला पंचायत की ‘शतरंज’ में लगातार 12 साल से सबसे ज्यादा तजुर्बेकार सियासतदां रहे हैं। उनका शह और मात का खेल अबकी बार क्या रंग लाएगा, ये देखना बाकी है। अमर उजाला ने ठा. जयवीर सिंह से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इसके प्रमुख अंश...।

सवाल : अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ कौन सा राजनीतिक दल या कौन से लोग एकजुट हुए हैं?

जवाब : जिपं सदस्यों के चुनाव के बाद बसपा के दस सदस्य थे लेकिन भाजपा, कांग्रेस, लोकदल, सपा और निर्दलियों ने हमारे साथ कदम से कदम मिलाया और नीटू को 42 सदस्यों के जबरदस्त समर्थन के साथ अध्यक्ष बनाया। अब सपा के कुछ लोग अन्य लोगों को मिला कर खिलाफत कर रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है। 
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सवाल : ये क्या बसपा और भाजपा की लड़ाई है?

जवाब : नहीं। भाजपा शुरुआत से हमारे साथ रही है। जिला पंचायत में दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर जिले की विकास की राजनीति में उन्होंने हमारा साथ दिया। भाजपा के सभी वरिष्ठ संजीदा नेता, विधायक, सांसद हमारे साथ हैं।   

सवाल : फिर वो कौन है, जो इतनी खिलाफत पर उतर आये हैं?

जवाब : सभी दलों में और सभी बड़े नेताओं के साथ रहने वाले कुछ लोग अकसर अहसान फरामोश हो जाते हैं, जो वक्त देख कर पाला बदलते हैं। ऐसे ही लोग खिलाफत कर रहे हैं। लेकिन सब जानते हैं कि उनमें कोई दम नहीं है। इस गुट में कोई भी गंभीर नेता नहीं हैं। हां कुछ लोग इनको हवा जरूर दे रहे हैं।  

सवाल : आपने चौ. सुधीर सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। इसके बाद उपेंद्र सिंह के अध्यक्ष बनने पर भी वह अध्यक्ष न होते हुए भी सक्रियता से काम करते रहे। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ वो आपके खिलाफ हो गए?

जवाब : विधानसभा चुनाव के नतीजे आने तक वह जिला पंचायत में खैर के समर्थकों के साथ मौजूद थे। जैसे ही नतीजा भाजपा के पक्ष में आया, वह कुछ लोगों के साथ दूसरे खेमे में चले गए। इसके बाद से लगातार हमारे विरोधियों के साथ सक्रिय हैं।  

सवाल : आपने कहा कि आपके साथ 42 जिपं सदस्यों का समर्थन था। अब 34 का है तो आठ की संख्या कम कैसे हो गई है? 

जवाब : कुछ सदस्य बहलाने फुसलाने में आ गये हैं। वह कुछ वक्त के लिए भ्रमित हो गए हैं लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि वे आखिर में हमारे साथ ही होंगे। क्योंकि हमारे जैसी निष्पक्ष राजनीति हर कोई नहीं करता है। जो 34 सदस्य हमारे पास हैं। जिला प्रशासन जब चाहे उनसे हकीकत जान सकता है। सभी शपथ पत्रों की जांच करा सकता है। क्या इतने लोग बिना अपनी सहमति के हमारे पक्ष में शपथ पत्र दे सकते हैं।

सवाल : बरौली विधायक एवं आपके चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी ठा. दलवीर सिंह ने कहा है कि वह तब तक विरोध करते रहेंगे, जब तक उपेंद्र सिंह नीटू अध्यक्ष पद से हट नहीं जाते। 

जवाब : कैबिनेट मंत्री रहने के दौरान ठा. दलवीर सिंह की पुत्रवधू पुष्पलता चंडौस की ब्लाक प्रमुख रहीं। सपा विधायक की पत्नी ब्लाक प्रमुख रहीं लेकिन मैंने कभी व्यक्तिगत विरोध की राजनीति नहीं की।   

सवाल : आपके विरोधी खेमे से 29 जिपं सदस्यों का शपथ पत्र लगा कर अविश्वास प्रस्ताव की पेशकश की गई थी। अब इनकी संख्या घटकर 25 बताई जा रही है। सही बात क्या है? 

जवाब : मैं एक बात कहता हूं कि सभी जिला पंचायत सदस्य बिना किसी दबाव के आए अपना फैसला खुद करें कि वह नीटू के साथ हैं या किसी और के साथ? विरोधी खेमे में अब 25 सदस्य ही हैं, तो अविश्वास प्रस्ताव नहीं आ सकता है। बाकी जिला प्रशासन खुद निर्णय करेगा।

सवाल : दो दर्जन से अधिक जिला पंचायत सदस्य गायब हैं। उनके फोन बंद हैं। आपने इस बाबत जिला प्रशासन से कोई बात की है?

जवाब : मैं जिला प्रशासन से अनुरोध करता हूं कि वह सदस्यों का पता लगाए। मेरी जानकारी के अनुसार कुछ सदस्यों को उत्तराखंड में गोपनीय स्थान पर नजरबंद कर रखा गया है।
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