रामघाट रोड पर दुबे का पड़ाव से लेकर क्वार्सी चौराहा तक छह किमी का रास्ता दिन में 45 मिनट से एक घंटे के बीच तय होता है। इसकी वजह सड़क किनारे वाहनों का खड़ा होना, ठेले-खोमचों वालों की भीड़ और बड़े-बड़े व्यावसायिक भवनों की पार्किंग सड़कों पर होना है।
अलीगढ़ शहर का सबसे व्यस्त रामघाट रोड इन दिनों दिन भर जाम से जूझ रहा है। वजह है बिना किसी कार्ययोजना के एक साथ इस मार्ग के साथ-साथ चारों तरफ सड़क निर्माण होना। बड़े-बड़े व्यावसायिक भवनों की पार्किंग सड़कों पर होना। इनमें 17 अस्पताल भी शामिल हैं।
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इसी बीच जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हर बार की तरह इस बार भी बिना पार्किंग वाले प्रतिष्ठानों पर शिकंजा कसने की कार्ययोजना बनी है। सवाल यह है कि इस कार्ययोजना का परिणाम क्या होगा। क्या हर बार की तरह सिर्फ नोटिस देने व सीलिंग के दावे करने तक के परिणाम ही सामने आएंगे, या इन प्रतिष्ठानों को पार्किंग बनवाने के लिए बाध्य किया जाएगा।
रामघाट रोड के ये हालात
रामघाट रोड पर दुबे का पड़ाव से लेकर क्वार्सी चौराहा तक छह किमी का रास्ता दिन में 45 मिनट से एक घंटे के बीच तय होता है। इसकी वजह यह है कि एक तो इस मार्ग पर सड़क निर्माण चलना, दूसरा सड़क किनारे वाहनों का खड़ा होना, ठेले-खोमचों वालों की भीड़ और बड़े-बड़े व्यावसायिक भवनों की पार्किंग सड़कों पर होना है।इस प्रमुख मार्ग पर लगने वाला जाम पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्वस्त कर देता है।
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इसी मार्ग के जरिये प्रदेश के बरेली, बदायूं, मुरादाबाद और बुलंदशहर समेत कई जिले अलीगढ़ से जुड़ते हैं। मथुरा जाने वाले लोग भी इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। क्वार्सी फ्लाईओवर निर्माण से पहले हुए सर्वे के अनुसार प्रतिदिन यहां से 40 हजार वाहन गुजरते हैं, जिनमें से 15 फीसदी वाहन बाईपास से गुजरते हैं। ऐसे में इस मार्ग के सर्वाधिक भीड़ वाले सभी अस्पतालों व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पार्किंग होना जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान सिर्फ नोटिसों तक सीमित रहता है।