एक आरोपी के आर्थिक हालात कमजोर होने के कारण वह अपने लिए अधिवक्ता खड़े न कर सका। इस पर जमानत पर आने के बाद फिर वारंट होने पर वह जेल चला गया। फरवरी 2022 में जेल प्रशासन की मदद से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उसे लीगल काउंसिल मुहैया कराए गए। उनके द्वारा पैरवी की गई और प्रतिदिन सुनवाई हुई।
अलीगढ़ महानगर के बन्नादेवी क्षेत्र में हमले के 22 वर्ष पुराने मुकदमे में साक्ष्यों व गवाही के अभाव में तीन आरोपी अपर सत्र न्यायालय से बरी किए गए हैं। इस मामले में एक आरोपी आर्थिक तंगी के कारण खुद अधिवक्ता नहीं कर पाया था, जिसे विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता मुहैया कराए गए थे।
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इस संबंध में विधिक सेवा प्राधिकरण से नियत अधिवक्ता व डिप्टी चीफ लीग्ल एड डिफेंस काउंसिल अनुज कुलश्रेष्ठ के अनुसार घटना 3 अगस्त 2001 की है। वादी मुकदमा सूत मिल बीमा नगर के धीरज कुमार ने मुकदमे में आरोप लगाया कि बंटी, उसके भाई राकेश, साथी भूरा निवासी एलमपुर, चंद्रपाल निवासी अलापुर गडिय़ा व अन्य 10-12 अज्ञातों पर आरोप लगाया कि किराएदार के घर में आने जाने के विवाद में बंटी सहित अन्य आरोपियों ने उसके साथ घर में घुसकर लाठी-डंडों से मारपीट की। बीचबचाव में मां और पत्नी को भी पीटा गया।
इस मुकदमे में ट्रायल के दौरान राकेश की मौत हो गई। इस मुकदमे के एक आरोपी बंटी के आर्थिक हालात कमजोर होने के कारण वह अपने लिए अधिवक्ता खड़े न कर सका। इस पर जमानत पर आने के बाद फिर वारंट होने पर वह जेल चला गया। फरवरी 2022 में जेल प्रशासन की मदद से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उसे लीगल काउंसिल अनुज कुलश्रेष्ठ मुहैया कराए गए।
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उनके द्वारा पैरवी की गई और प्रतिदिन सुनवाई हुई। जिसमें वादी पक्ष के गवाह व कमजोर साक्ष्य अदालत में खड़े नहीं हो सके और तीनों आरोपी बरी कर दिए गए। अधिवक्ता अनुज के अनुसार वादी, उसकी मां व पत्नी का कोई मेडिकल परीक्षण न होना, घटना का समय स्पष्ट न कर पाना ऐसे आधार बने, जिसके चलते न्यायालय ने इसे संदिग्ध माना है।