अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने तक आरक्षण मामले में यहां कोई बदलाव संभव नहीं है। इसके अलावा राष्ट्रीय एससी, एसटी आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया के सभी सवालों का जवाब भी एएमयू तय समय में देगा।
राष्ट्रीय एससी, एसटी आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया द्वारा आरक्षण का मामला उठाने एवं एएमयू के अधिकारियों से बातचीत के बाद एएमयू प्रशासन का कहना है कि 2005 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई है।
जब तक एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित वाद का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नहीं लिया जाता, इसकी प्रवेश नीति में किसी प्रकार का आरक्षण संबंधी बदलाव संभव नहीं है। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि एएमयू ने कभी भी मुसलमानों के आरक्षण की नीति पर कार्य नहीं किया है, बल्कि विश्वविद्यालय में धर्म अथवा जाति से अलग केवल इंटरनल छात्र व छात्राओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
राम शंकर कठेरिया द्वारा अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित साक्ष्य पेश करने के लिए एक महीने का समय दिए जाने के सवाल पर एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि आयोग द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब जरूर दिया जाएगा। उनका कहना है कि एएमयू की व्यवस्था संसद द्वारा पारित एएमयू एक्ट 1981 के अंतर्गत नियंत्रित है, जिसने एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया है। सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को अनुच्छेद 15(5) के अंतर्गत अन्य संवैधानिक आरक्षणों से मुक्त रखा गया है।