धुंध की चादर.. अलीगढ़ दिल्ली नेशनल हाईवे नंबर 91 पर
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जनपद में जहरीले प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानक से नौ गुना तक पहुंच गया है। इसका खुलासा प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम के सर्वे में हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण दिल्ली से आई धुंध तो है, साथ ही अपने ही शहर से उठे कार्बन पार्टिकल भी हैं। इस जहर को निगलने से जिले में आंखों में जलन, खांसी एवं एलर्जी की समस्या बढ़ी है।
स्मार्ट विलेज फाउंडेशन के अध्यक्ष विपिन चौधरी ने इस बाबत प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक डा. जेपी सिंह से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उन्होंने विभागीय टीम से धुंध की जांच कराई थी। उसके मुताबिक अलीगढ़ में 5 नवंबर को पहली बार दिल्ली जैसी जहरीली धुंध ने कब्जा जमा लिया था। इसी दिन विभाग ने धुंध के सैंपल लेकर जांच की थी तो आरएसपीएम 900 के करीब पाया।
डा. जेपी सिंह के मुताबिक मानक के मुताबिक यह आंकड़ा 100 से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के समय फिल्टर जबरदस्त काला पड़ गया था, क्योंकि इस धुंध में कार्बन पार्टिकल्स इतने ज्यादा हैं। इसी के कारण आंखों में जलन, खांसी और एलर्जी जैसी परेशानियाँ हो रही हैं। सोमवार को भी सैंपल लेने के लिए यंत्र को 8 घंटे मानसरोवर में रखा गया है। मंगलवार को इसकी रिपोर्ट भी आ जायेगी।
शहर के आसमान पर पिछले कुछ दिनों से छाया जहरीला धुआं आंखों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। आंखों की तकलीफों के मामले बढ़ गए हैं। गांधी नेत्र चिकित्सालय समेत जिला अस्पताल में भी आंखों की तकलीफ के मरीज ज्यादा संख्या में आ रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए एएमयू के सभी स्कूल में नर्सरी से कक्षा 2 तक की कक्षाओं को 8 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने शहर के अन्य स्कूलों के संबंध में यह आदेश रविवार को ही जारी कर दिए थे।
गांधी नेत्र चिकित्सालय के प्रशासनिक अधिकारी मधुप लहरी भी शहर में छाए इस जहरीले धुएं की चपेट में आ गए हैं। उनकी आंखों से लगातार पानी आ रहा है और जलन महसूस हो रही है। उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल की ओपीडी में लागातार ऐसे केस आ रहे हैं, जिनमें मरीज जलन, आंखें लाल होना और आंखों से लगातार पानी आने की शिकायतें कर रहे हैं।