प्रदेश में 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद अपने शहर में दिन दहाड़े हुई सनसनीखेज वारदात का खुलासा भी पुलिस ने चंद रोज में कर दिया और मुख्य आरोपी बुलंदशहर के कुख्यात लुटेरे व 50 हजार रुपये के इनामी विकास उर्फ खुजली को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था।
कैश वैन में 1.20 करोड़ रुपये थे और लुटेरे पूरी रकम लूट के इरादे से आए थे। मगर जीटी रोड जैसे व्यस्त इलाके में ये संभव नहीं हो पाया। यह सरकार के दौरान जिले में पहली पुलिस मुठभेड़ थी। बदमाशों की तलाश में जुटी पुलिस को आठ दिन बाद सूचना मिली थी कि घटना में शामिल बदमाश वैष्णो रॉयल सिटी गेट के बाहर रकम बंटवारे के इरादे से खड़े हैं। पुलिस ने घेराबंदी कर छह बदमाश गिरफ्तार किए, जबकि चार भागने में सफल रहे। उन्होंने स्वीकारा कि विकास व सुमित ने साजिश रची और उनके साथ मिलकर उन्होंने 34 लाख रुपया लूटा था।
साढ़ नौ लाख रुपये विकास व सुमित अपने साथ ले गए। बाकी को एक-एक लाख रुपये देकर गए। भागने के लिए गोपाल की स्कार्पियो का इस्तेमाल किया। बाकी बदमाश दो बाइकों से भागे थे। दो बदमाशों ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। सुमित को सीडीएफ चौकी के पीछे पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया, जिसके गोली लगी थी। इसके बाद विकास पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ और वह छेरत में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। मारा गया विकास बुलंदशहर के अहमदगढ़ के हरचंदपुर का रहने वाला था। उसकी मौत पर उसके परिवार ने भी साफ कह दिया कि जैसा कर्म किया है, वैसा ही भुगता है।
घटनाक्रम एक नजर में
- 17 जुलाई 2017 को कैश वैन के गार्ड की हत्या कर नकदी लूटी
- 25 जुलाई- सोनू, दीपक, रतज, रौकी, अरुण, मोहित दबोचे, 6.05 लाख बरामद।
- 11 अगस्त- गोपाल उर्फ संदीप को रिमांड पर लेकर हथियार बरामद किए।
- 12 अगस्त- सुमित को दबोचा, 23.80 लाख रुपये व रिवाल्वर बरामद।
- 19 अगस्त- ललित को रिमांड पर लेकर लूटी गई रकम बरामद की।
- 23 अक्तूबर-मुकदमे में चार्जशीट दायर की, चार सितंबर को तय हुए आरोप।
- 22 नवंबर 2019 को गवाही शुरू हुई, छह दिसंबर 2023 को गवाही पूर्ण।
- 12 दिसंबर 2023 को हत्या और लूटपाट के मुकदमे में सजा सुनाई गई है।
सुनील कुमार वादी चश्मदीद साक्षी, मुकेश गार्ड, कलामुद्दीन जख्मी गार्ड, डा.विकास रघुवंशी पीएमकर्ता, एसआई रूपचंद्र पंचनामाकर्ता, डा.सचिन वर्मा मेडिकल डॉक्टर, विवेचक इंस्पेक्टर दिनेश दुबे, द्वितीय विवेचक रविंद्र दुबे, मुकदमा लेखक दुशासन, गिरीश, सिपाही गौरव, विवेक, आर्म्स एक्ट विवेचक रमेश चंद्र व योगेंद्र कुमार।
बचाव पक्ष के गवाह
आदेश उर्फ रॉकी की ओर से नागेंद्र कुमार दीक्षित, अरुण उर्फ टौडी के पक्ष से राकेश कुमार राघव, अपराधी मोहित के पक्ष से श्याममुरारी सिंह पेश हुए। सभी ने गिरफ्तारी को झूठा करार दिया।
ये साक्ष्य बने सजा का आधार
14 गवाह और 52 साक्ष्य अभियोजन की तरफ से पेश किए गए। तीन साक्ष्य बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्तों के मौके पर न होने के संबंध में प्रस्तुत किए। शिनाख्त परेड न होने की दलील दी गई। बरामद माल घरेलू कारोबार का बताया, पर साक्ष्य नहीं। मुकदमे में तीन लोगों का शामिल होना करार दिया। क्रमवार अपराधियों से माल बरामद होना। बरामद हथियारों का बैलेस्टिक जांच में मिलान होना सजा के आधार बने।
डाके के दौरान कैश वैन कस्टोडियन हुआ था जख्मी
इस घटना के समय कैश वैन के गार्ड की हत्या हुई थी, जबकि कैश वैन का कस्टोडियन कलामुद्दीन जख्मी हुआ था। उसे तमंचे की बट से जख्मी किया गया था।
एयरटेल कंपनी का छह लाख लूटने की भी थी तैयारी
इस घटना में शामिल छह बदमाश जब गिरफ्तार किए गए। वे एयरटेल कंपनी का छह लाख रुपया लूटने की योजना बना रहे थे। उसी योजना बनाते समय गिरफ्तार किए गए थे।
जिस समय लूट की ये घटना हुई। शहर के हालात सांप्रदयिक दृष्टि से सामान्य नहीं थे। उसी वर्ष भाई दूज के दिन रेलवे रोड पर दोहरा हत्याकांड हुआ। उस कांड के ठीक बाद शुक्रवार को जुमे की नमाज की दोपहर ऊपरकोट पर पुलिस ने टकराव के बाद उपद्रव हुआ था। पुलिस शहर को सामान्य करने में लगी थी। हालात बेहद नाजुक थे। इसी बीच लुटेरों ने इस घटना को अंजाम देकर पुलिस को प्रदेश भर में चुनौती दे दी थी।
ढाबे पर रची साजिश, वहीं से पुलिस को मिले थे सुराग
इस पूरी वारदात को खुलासा करने के लिए तत्कालीन एसएसपी राजेश पांडेय, एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव की अगुवाई में पूरी पुलिस टीम लगी रही। एसओजी, सर्विलांस प्रभारी, उस समय के एसओ इंस्पेक्टर जुटे रहे। कई दिन की रेकी के बाद तय हुआ कि घटना धनीपुर मंडी गेट के बाहर के एक ढाबे से रची गई। उसी ढाबे पर मुखबिरों का जाल फैलाकर पहले छह बदमाश पकड़े।
ये रही अभियोजन की दलील
अभियोजन पक्ष की ओर से माल बरामदगी का क्रम, हथियारों की बैलेस्टिक जांच, पुलिसकर्मियों का क्रम साक्ष्य पेश किया गया। उसी को सजा का आधार बनाया गया।
ये रही बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष के गवाहों की ओर से तर्क दिया गया कि गिरफ्तारी उनके निजी ठिकानों से हुई। घरेलू व व्यापारिक रकम लाने ले जाने के समय उसे बरामद दिखाया गया। मगर अदालत में साक्ष्य साबित नहीं हो सके।
पहले 14 जुलाई को करनी थी वारदात, बाइक पंक्चर होने पर टाल दी
बदमाशों को वारदात को 14 जुलाई को अंजाम देना था। उस दिन पूरी योजना भी बना ली गई थी। लेकिन जब वारदात को अंजाम देने निकले तो एक बदमाश की बाइक पंक्चर हो गई। जिसके चलते वारदात टाल दी और तीन दिन बाद 17 जुलाई को योजना के तहत वारदात को अंजाम दिया गया।