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नया है जमाना, गुरुजी सीखेंगे कैसे है पढ़ाना

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राजा तिवारी
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कोरोना संक्रमण काल के चलते परिस्थितियां बदल गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के क्रम में अभी जुलाई में बच्चों के लिए स्कूल खोले नहीं जाएंगे। ऐसे में अनलॉक-2 के दिशा निर्देशों के क्रम में नवीन सत्र के दाखिले से लेकर बच्चों की शिक्षा निरंतर जारी रखने के लिए विद्यालय प्रबंधन प्रयासरत हैं। वर्तमान हालातों में अब शिक्षकों को भी तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर रहेगा। एक ओर शिक्षकों को बताया जाएगा कि बच्चों को कैसे पढ़ाना है। साथ ही दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा भी जारी रहेगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए डाटा बैंक भी काफी हद तक मदद करेगा।
कोरोना संक्रमण काल में कई निजी स्कूलों और सरकारी स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई प्रारंभ की थी। अप्रैल-मई में कुछ निजी स्कूलों ने तो नए सत्र का पाठ्यक्रम लगभग 20 प्रतिशत तक पढ़ा दिया है, जबकि कुछ छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं, जिन्होंने अभी तक ऑनलाइन कक्षाओं में प्रतिभाग नहीं किया है। कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा स्थिर नहीं हो रहा है। इसीलिए अभी ऑनलाइन पढ़ाई की ही तैयारियां की जा रही हैं। ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित बच्चों को कैसे पढ़ाया जाएगा। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन और माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा रणनीति बनाई जा रही है। वर्तमान समय को देखते हुए अपर मुख्य सचिव द्वारा मिले आदेशों में साफ-साफ कहा गया है कि शिक्षक, कर्मचारी, स्टाफ ही विद्यालय में जा सकते हैं। वह भी मास्क, सैनिटाइजेशन और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए। नवीन सत्र नियमित रखने के लिए ही स्कूल खोले गए हैं। ऐसे में अभी ऑनलाइन शिक्षा पर ही तैयारियां चल रही हैं। जो शिक्षक तकनीकी रूप से कमजोर हैं। उन शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ वर्तमान हालातों में बच्चों को कैसे पढ़ाना है। इसके बारे में भी सिखाया जाएगा।
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अति आवश्यक कार्यों को पूरा करने के लिए ही स्कूलों को खोला गया है। चूंकि शासन से निर्देश मिले हैं कि 15 जुलाई तक ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ कराना है। ऐसे में प्रधानाचार्यों के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जो शिक्षक तकनीकी रूप से मजबूत नहीं होंगे। उन्हें विद्यालय प्रबंधन स्तर से ही प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही जो शिक्षक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। वह कैसे बच्चों को बेहतर पढ़ा सकते हैं। इसके लिए वेबिनार का आयोजन कर प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
- डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, डीआईओएस
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