सप्ताह भर से स्कूल चलोे अभियान तो चलाया रहा है और बच्चोें को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है लेकिन बच्चों को अभी तक नई किताबें नहीं दी गई हैं। बच्चों को पढ़ने के लिए नई कक्षाओं में फटी-पुरानी किताबें थमाई जा रही हैं।
काफी बच्चों को तो पुरानी किताबें भी नहीं मिल रही। स्थिति यह है कि अभी परिषदीय स्कूलों के बच्चों को कई माह तक नई किताबों के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
30 मार्च को रिजल्ट वितरण के बाद ही बेसिक शिक्षा महकमे ने स्कूल चलो अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत रैलियां निकाली जा रही हैं और होेर्डिंग्स, बैनर आदि लगवाए जा रहे हैं। रैली आदि के लिए महकमे ने अपने हर हर स्कूल के खाते में पांच-पांच सौ रुपये की धनराशि भेज दी गई है लेकिन बात यदि किताबों की करें तो स्कूलों में बच्चों के लिए अभी नई किताबें नहीं आई हैं। फटी-पुरानी किताबें ही बच्चोें को पढ़ने के लिए दी जा रही हैं।
उसमें भी काफी बच्चों को पुरानी किताबें भी नहीं मिल पा रही। उसकी मुख्य वजह यह है कि पिछली साल काफी बच्चों ने पूरी किताबें नहीं जमा कराई। ऐसे में कुछ बच्चों को एक या दो विषय की किताबें ही थमा दी गई हैं। स्कूल चलो अभियान को लेकर तो बेसिक शिक्षा महकमे ने तत्परता दिखाई लेकिन किताबोें को लेकर विभाग बेहद उदासीनता बरत रहा है। ऐसे में अभी स्कूली बच्चों को कई माह नई किताबों के लिए इंतजार करना होगा।