दिव्यांग किसान को यूरिया के लिए गोद में उठाकर लाया भतीजा। संवाद
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शेखर ने बताया कि उसके चाचा दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। चल-फिर नहीं सकते लेकिन नियमों को हवाला देकर सहकारी समिति से यूरिया देने से इन्कार कर दिया गया। मजबूरी में 10 किलोमीटर दूर गांव कोरह रघुपुरा जाकर लौटा भतीजा शेखर काफी देर तक दिव्यांग चाचा कुंवरपाल को गोद में उठाए समिति कर्मियों के पास चक्कर काटता रहा, तब जाकर दो बोरी यूरिया मिल सकी।
कुंवरपाल सिंह ने बताया कि मक्का की फसल के लिए पांच बोरी यूरिया की जरूरत है। भतीजा उन्हें गोद में उठाकर सहकारी समिति लाया। घंटों लाइन में लगने के बाद पांच की जगह सिर्फ दो बोरी यूरिया ही मिल सकी।
उन्होंने बताया कि खेती में भतीजा शेखर हाथ बंटाता है। यूरिया के लिए शेखर मंगलवार को क्षेत्रीय सहकारी समिति उत्तरी पहुंचा था, लेकिन कर्मचारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि जिसके नाम जमीन है, उसी का अंगूठा लगेगा, तभी यूरिया मिलेगी। मजबूरी में भतीजा गांव लौटा और उन्हें लेकर दोबारा समिति में पहुंचा। गोद में उठाकर काफी देर तक घूमने के बाद दो बोरी यूरिया देकर तीन बोरी बाद में लेने के लिए कहा गया।
किसान राजवीर सिंह, सुमित राघव, दीपक लोधी आदि ने दिव्यांग प्रमाण पत्र दिखाने पर परिवार वालों को खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, समिति के सचिव हरिराज वर्मा ने कहा है कि दिव्यांग किसान को सबसे पहले खाद दिया गया था। उनके रकबे के हिसाब से जितना खाद बनता है, उससे अधिक नहीं दे सकते। नियम सभी के लिए समान हैं।