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नेपाल बाढ़ त्रासदी: मौत का मंजर देख लौटे भाई, राखी बांधते हुए बहनों की आंखें भर आईं

Sat, 29 Aug 2026 05:16 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

तबाही मचाने वाली बाढ़ आने के बाद अलीगढ़ से कारोबार करने वाली 10 से अधिक नेपाली पार्टियों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जिससे लगभग 10 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
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नेपाल से लौटे कृष्ण प्रताप सिंह व रोहित को राखी बांधतीं बहनें - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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नेपाल में बाढ़ की तबाही देखकर लौटे भाइयों ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के मौके पर बहनों से राखियां बंधवाई। बहनें बाढ़ की खबर मिलने के बाद से भाइयों की चिंता में डूब गईं थीं। उनसे मिलकर वह भी अपने आंसू छिपा नहीं पाईं।

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शुक्रवार की सुबह रोहित वार्ष्णेय, उनके भाई भारत वार्ष्णेय और कृष्ण प्रताप सिंह नेपाल से लौटे हैं। तीनों नेपाल सीमा पार करने के बाद गोरखपुर पहुंचे और वहां से वैशाली एक्सप्रेस में सवार होकर अलीगढ़ आए। घर पहुंचते ही इनके परिजन खुशी से झूम उठे। त्योहार के दिन बेटों की सकुशल वापसी से माता-पिता भी भावुक हो गए। उनके आने की खबर मिलते ही रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।

दोपहर बाद बहन कोमल टुटेजा रोहित के जेल रोड स्थित आवास पर पहुंची और उनसे मिलकर रो दीं। गले मिलकर भाई को स्नेह दिया। तिलक लगाकर राखी बांधी और मुंह मीठा कराया। इसके बाद कोमल ने दूसरे भाई भारत को भी राखी बांधी। रोहित की बुआ और फूफा भी घर पहुंचे थे। इसी तरह से कृष्ण प्रताप सिंह ने भी अपनी बहन से मिलकर राखी बंधवाई। उनके परिजन भी खुश थे। इन घरों के बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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भाई भारत को राखी बांधती बहन कोमल - फोटो : स्वयं
अलीगढ़ का माल लेने वाली 10 से अधिक नेपाली पार्टियां लापता, 10 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित
तबाही मचाने वाली बाढ़ आने के बाद अलीगढ़ से कारोबार करने वाली 10 से अधिक नेपाली पार्टियों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जिससे लगभग 10 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। नेपाल की त्रिशूल नदी के किनारे बसे राम्रो बाजार एवं उसके आसपास का इलाका बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह बहुत बड़ा बाजार था, जहां अलीगढ़ के ताला और हार्डवेयर की खूब बिक्री होती थी। अलीगढ़ के व्यापारी काठमांडू के थोक व्यापारियों के द्वारा वहां तक सप्लाई पहुंचाते थे। राम्रो बाजार के कई दुकानदार लापता हैं, जहां पहले बाजार होता था, अब वहां मलबा और शवों के ढेर पड़े हैं।

इंडो नेपाल एक्सपोर्टर एसोसिएशन के महासचिव प्रदीप चौधरी ने बताया कि नदी के दूसरी ओर त्रिशूली बाजार था, वहां भी मलबे का मैदान बन चुका है। इस नदी के आसपास दोनों ओर बड़ी मात्रा में आमजन रहते थे, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा है। नारायण घाट, बुटवल और पोखरा के बड़े थोक कारोबारियों के माध्यम से अलीगढ़ का माल त्रिशूली बाजार पहुंचता था। अब यह सप्लाई चेन टूट चुकी है, जिसको दोबारा बनाने में महीनों का वक्त लग सकता है।

प्रदीप ने बताया कि वह लगातार नेपाल के कुछ कारोबारियों से जानकारी ले रहे हैं, जो सुरक्षित हैं और जिनका फोन उठ रहा है। संगठन प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए तैयार है। केंद्र सरकार भी मदद पहुंचा रही है। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ के अलावा फिरोजाबाद, आगरा, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी आदि शहरों से भी कई उत्पादों का निर्यात होता है। यह सभी कारोबार भी प्रभावित हुए हैं।
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