पहले निलंबन और उसके बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई भी लेखपालों के तीखे तेवरों को नरम नहीं कर सकी। प्रशासनिक अफसरों के साथ शुक्रवार को कई घंटे चली वार्ता के दौरान लेखपालों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल को प्रांतीय नेतृत्व का आदेश बताते हुए हड़ताल वापस लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया। इधर, प्रशासन द्वारा गुरुवार सायं प्रोबेशन पर चल रहे 96 लेखपालों को जारी किये गए बर्खास्तगी के नोटिस भी स्वीकार न करने पर प्रशासन के पास शासनादेश का इंतजार करने का ही विकल्प बचा है। इस सबके बीच लेखपालों का धरना प्रदर्शन जारी रहा।
नौ जुलाई से अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपाल उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के बैनरतले अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते तहसीलों का काम ठप है। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति उन छात्र-छात्राओं की है जिन्हें एएमयू समेत अन्य इंजीनियरिंग समेत अन्य कालेजों में प्रवेश के लिए जाति, आय एवं निवास प्रमाणपत्र बनवाना है।
हालांकि शासन ने ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों को इन प्रमाणपत्रों को जारी करने का अधिकार दे दिया है, लेकिन यह व्यवस्था भी अपेक्षा के अनुरूप खरी नहीं उतर पा रही है। सात दिन में प्रमाणपत्र जारी करने के आदेशों के बावजूद प्रमाणपत्र जारी होने में लंबा समय लग रहा है।
इस स्थिति से परेशान प्रशासन कार्रवाई के हथियार से लेखपालों को काम पर वापस लौटाने की कोशिशों में जुट गया है। पहले लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष, मंत्री, तहसील अध्यक्ष एवं मंत्रियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई एवं उसके बाद प्रोबेशन पर चल रहे 96 लेखपालों की बर्खास्तगी के आदेशों के बाद गत सायं नोटिस जारी कर दिये गए। यही नहीं बस्ता जमा न करने वाले लेखपालों को जेल भेजने की भी चेतावनी दी। लेकिन लेखपालों द्वारा नोटिस स्वीकार न करने के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को लेखपालों को वार्ता के लिए बुलाया।
क्या कहते हैं लेखपाल नेता
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष साहब सिंह व जिला मंत्री ध्यान प्रकाश तिवारी ने बताया कि शुक्रवार को डीएम की अध्यक्षता में हुई वार्ता में प्रशासन ने लेखपालों से हड़ताल खत्म करने अथवा कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा। लेकिन हमने इसे प्रांतीय नेतृत्व का आदेश बताते हुए हड़ताल वापस लेने से इंकार कर दिया है। चाहे प्रशासन हमारे खिलाफ चाहे जो कार्रवाई करे, जब तक प्रांतीय नेतृत्व का आदेश नहीं होगा, हम हड़ताल जारी रखेंगे।
प्रोबेशन पर चल रहे 96 लेखपालों को गुरुवार सायं बर्खास्तगी के नोटिस जारी किये गए थे। लेकिन किसी ने नोटिसों को स्वीकार नहीं किया। अब इस मामले में कार्रवाई के लिए शासनादेश का इंतजार है।
- आरएन शर्मा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
कुछ लेखपालों के काम पर लौटने की चर्चा, संगठन ने किया इंकार
लेखपालों का आंदोलन तोड़ने के लिए प्रशासन हर हथकंडा अपना रहा है। कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने शुक्रवार को दावा कर डाला कि प्रोबेशन पर चल रहे कुछ लेखपाल काम पर लौट आए हैं। लेकिन लेखपाल संघ ने इससे इंकार कर दिया। संघ के मंत्री ध्यान प्रकाश तिवारी ने दावा किया कि शत प्रतिशत लेखपाल उनके साथ हैं। यह प्रशासन का आंदोलन खत्म करने का हथकंडा है। बाद में कुछ अफसरों ने पुष्टि की कि इक्का-दुक्का काम पर लौटे लेखपाल अवकाश से लौटे हैं।