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बच्चों की सुरक्षा पर लापरवाही : सड़कों पर दौड़ रहे जर्जर स्कूल वाहन

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माेहम्मद रेहान।
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अप्रैल में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ स्कूलों में बच्चों की आवाजाही तेज हो गई है, लेकिन उन्हें ढोने वाली बसों और वैन की हालत चिंता बढ़ा रही है। कागजों में फिट दिख रहे कई वाहन जमीनी हकीकत में जर्जर हालत में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कहीं फिटनेस प्रमाणपत्र अधूरे हैं, तो कहीं सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
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जिले में सीबीएसई के 94 स्कूल हैं, जबकि आईसीएसई बोर्ड के छह स्कूल हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को लाने और ले जाने के लिए 4832 छोटे-बड़े (बस-वैन) वाहन लगे हैं। जांच में पाया गया कि इनमें से अधिकांश का पंजीकरण व्यावसायिक रूप में नहीं है।


कई वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र समय पर नवीनीकृत नहीं कराए गए, जबकि कुछ के पंजीकरण की अवधि ही समाप्त हो चुकी है। स्कूल बसों और वैन में जरूरी सुरक्षा मानकों का भी अभाव मिला। कई वाहनों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस सिस्टम, स्पीड गवर्नर, अग्निशामक यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं थे।
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आरटीओ दीपक कुमार शाह ने बताया कि उनके कार्यालय में 1090 वाहनों का पंजीकरण है। इनमें 963 वाहनों की फीडिंग की गई है, जबकि 854 वाहनों का निरीक्षण किया गया है। मार्च और अप्रैल में चलाए गए अभियान में 194 अनफिट और बिना परमिट के वाहनों का चालान किया गया है। दूसरे चरण में ऑन बोर्ड पोर्टल पर वाहनों का रिकॉर्ड अपलोड किया जा रहा है। साथ ही वाहनों की फिटनेस की जांच भी की जा रही है।







सड़कों पर अनफिट स्कूली वाहनों को नहीं चलना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सबसे अहम है। अभिभावक बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के लिए मोटी रकम खर्च करते हैं, तो सुरक्षा के व्यापक इंतजाम होना चाहिए।

-डॉ. वसी अहमद जैदी, अभिभावक



जब बस या वैन फिट हों, तभी उसे स्कूल में लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? अक्सर हादसे के बाद स्कूल और प्रशासन एक-दूसरे पर लापरवाही का आरोप मढ़ते हैं।



-माेहम्मद रेहान, अभिभावक



मैं अनफिट वाहनों से बच्चों को लाने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। मगर वाहनों की जांच के नाम पर स्कूल को परेशान न किया जाए। मानकों को जो वाहन पूरा नहीं करते हैं, उसे सीज किया जाए।

-प्रवीन अग्रवाल, प्रबंधक, कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल




सड़कों पर अनफिट स्कूल वाहन नहीं चलना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। अपने स्कूल के वाहनों में सीसीटीवी कैमरे लगा रहे हैं। बस में दो कैमरे होंगे। इससे बस की लोकेशन का पता चल सकेगा। साथ ही निगरानी की जा सकेगी।

-अतिन अग्रवाल, सह निदेशक, विजडम पब्लिक स्कूल





केस-एक

सिविल लाइंस क्षेत्र में एक निजी स्कूल की वैन में क्षमता से अधिक 12-15 बच्चों को बैठाया गया। सीटें टूटी थीं और दरवाजा भी ठीक से बंद नहीं हो रहा था। वैन में अग्निशामक यंत्र भी नहीं था।

केस-दो
रामघाट रोड पर चल रही एक वैन की हालत इतनी खराब थी कि उसका साइलेंसर धुआं छोड़ रहा था। उसमें जीपीएस सिस्टम नहीं था। फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र नदारद था। गर्मी के चलते वैन में बैठे बच्चे परेशान थे।


स्कूल बस के टूटे फर्श से गिरी थी छात्रा
28 फरवरी को अलीगढ़ सीमा से सटे कासगंज के नगला साधु गांव में स्कूल बस का फर्श टूट गया था। इससे एक छात्रा सड़क पर गिर गई और टायर चढ़ने से उसकी मौत हो गई थी। यह बस अलीगढ़ दादों स्थित माउंट देवा इंटरनेशनल स्कूल में चल रही थी और वाहन का बीमा व परमिट समाप्त हो चुका था।

माेहम्मद रेहान।

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