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फिल्मी कहानी से कम नहीं: खेतों की पगडंडियों पर दौड़कर निखरीं नीरू, अब यूपी के लिए जीतेंगी सोना

Mon, 28 Jul 2025 04:32 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

इगलास के गदाखेड़ा की रहने वाली नीरू अपने पिता राजवीर शर्मा के साथ आलू के खेत में काम करती थीं। वह गांव के नहर की पटरी और खेतों की पगडंडियों पर दौड़ती थीं। मिट्टी के ट्रैक पर दौड़ते-दौड़ते सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने वाली नीरू खेल जगत में सोने की तरह अपनी चमक बिखेर रही हैं।
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नीरु के साथ यूपी टीम मैनेजर शमशाद निसार - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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खेतों की पगडंडियों से दौड़कर नीरू पाठक अब अंतरराष्ट्रीय धाविका बन गई हैं। छह साल बाद वह फिर से यूपी की तरफ से दौड़ेंगी। उन्हें एएफआई से (एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) एनओसी मिल गई है। अब वह यूपी के लिए पदक जीतने को लालायित हैं।

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एक छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय पर पदक जीतना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। इसके पीछे नीरू की जिद, जुनून, मेहनत और अनुशासन है। पगडंडी से सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। इगलास के गदाखेड़ा की रहने वाली नीरू अपने पिता राजवीर शर्मा के साथ आलू के खेत में काम करती थीं। वह गांव के नहर की पटरी और खेतों की पगडंडियों पर दौड़ती थीं। मिट्टी के ट्रैक पर दौड़ते-दौड़ते सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने वाली नीरू खेल जगत में सोने की तरह अपनी चमक बिखेर रही हैं। दिल्ली से खेलने वालीं नीरू अब यूपी के लिए दौड़ेंगी। इसके लिए एएफआई ने नीरू को एनओसी दी है। नीरू पाठक सात बहनों में चौथे स्थान पर हैं।

नीरू पाठक 29-30 जुलाई को गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ में आयोजित 28वीं यूपी स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग करेंगी। - विवेक कुमार, टीम मैनेजर
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आभारी हैं जिन्होंने नीरू को एनओसी दी है। अब नीरू के पदक दिल्ली के खाते में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश को मिलेंगे। हमें नीरू से स्वर्ण पदक की पूरी आशा है। - शमशाद निसार, अध्यक्ष, जिला एथलेटिक्स संघ

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दूरी के चलते दिल्ली को बनाया ठिकाना

नीरू ने बताया कि उन्हें अभ्यास करने के लिए गांव से स्पोर्ट्स स्टेडियम आना पड़ता था। गांव से इसकी दूरी करीब 30 किमी थी। रोजाना इतना सफर करना मुश्किल हो रहा था। आखिरकार, उन्होंने परिजनों की अनुमति के बाद दिल्ली में ठिकाना बनाया। दिल्ली में अभ्यास करना शुरू किया। वर्ष 2022 में स्टेट में मेडल जीतने के बाद पापा से कहा बुलेट बाइक लेनी है लेकिन पापा ने मना कर दिया। दिल्ली में मेरठ के कोच विशाल सक्सेना से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि तुम अच्छा दौड़ती हो, मेरठ आओ। इसके बाद मेरठ में रहकर अभ्यास शुरू कर दी।

ये रही उपलब्धियां
-2018 में जिला स्तर पर 100 मीटर में रजत पदक
-2019 में जिला स्तर पर 100, 200 मीटर व लंबी कूद में स्वर्ण पदक
-2019 में कानपुर स्टेट में 100 मीटर में कांस्य पदक
-2019 में तिरुपति नेशनल में यूपी का प्रतिनिधित्व करते हुए 200 मीटर में स्वर्ण व 100 मीटर में रजत पदक
-2022 में दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक
-2023 में दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक के साथ राष्ट्रीय एथलेटिक्स के लिए क्वालिफाई
-19वीं नेशनल यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में 400 मीटर रेस 52.85 सेकंड में दौड़कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, जो अब तक बरकरार है।
- 63वीं सीनियर इंटर स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप, पंचकूला (हरियाणा) में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन।
-साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर और 4 गुणा 400 मीटर रिले में स्वर्ण, 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक
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