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Friendship Day: अलीगढ़ में तो मोहल्ले का नाम ही मित्र नगर है, इसकी यह है दिलचस्प कहानी

Sun, 03 Aug 2025 02:36 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ के गोपाल दास नीरज और देवानंद का याराना भी बहुत मशहूर रहा। 1970 में जब देवानंद ने निर्देशक के रूप में पहली फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ बनाई तो उसके गीत नीरज ने लिखे और 2011 में जब आखिरी फिल्म चार्जशीट बनाई तो उसका भी गीत नीरज ने लिखा।
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देवानंद और गोपाल दास नीरज की दोस्ती भी मशहूर रही - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अलीगढ़ शहर में एक ऐसी जगह है, जिसका नाम ही मित्र नगर है। इस मोहल्ले के नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि जब यह कॉलोनी बस रही थी, तब दोस्तों का एक समूह यहां एक साथ रहने आया था। दोस्ती के इसी मजबूत रिश्ते के कारण इस जगह का नाम पहले मित्रों का नगर पड़ा और बाद में इसे छोटा करके मित्र नगर कर दिया गया। आज यह इलाका अलीगढ़ के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में से एक बन गया है, जो एक ऐसे शहर में दोस्ती की भावना का प्रतीक है जहां यह सब शुरू हुआ। इस तरह, मित्र नगर केवल एक नाम नहीं, बल्कि दोस्ती की एक जीती-जागती मिसाल है।

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कहते हैं निवासी
मित्र नगर में दोस्ती की जिंदादिली तो देखने को मिलती है। पार्क है जिसमें हम सभी हम उम्र मिलते हैं।-रमेश चंद्र शर्मा, स्थानीय बुजुर्ग
मुझे यहां पर रहते हुए 17 साल हो गए । सुना है कि मित्रों के नाम पर मोहल्ले का नाम पड़ा है। सभी लोग दोस्ताना हैं। - भुवनेश वार्ष्णेय
18 साल से यहां रह रहे हैं। बुजुर्गों से सुनते हैं कि यहां कई सारे दोस्त लोग रहने आ गए थे।-जय गोपाल वार्ष्णेय
मेरे सास और ससुर यहां रहते थे। यहां के विषय में अक्सर सुनते थे।- रुपिका

अलीगढ़ के नीरज और देवानंद की दोस्ती भी रही मिसाल
अलीगढ़ के गोपाल दास नीरज और देवानंद का याराना भी बहुत मशहूर रहा। 1970 में जब देवानंद ने निर्देशक के रूप में पहली फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ बनाई तो उसके गीत नीरज ने लिखे और 2011 में जब आखिरी फिल्म चार्जशीट बनाई तो उसका भी गीत नीरज ने लिखा। नीरज और देवानंद का आमना-सामना सन 1965 के आस-पास मुंबई में आयोजित एक कवि सम्मेलन में हुआ जिसकी अध्यक्षता देवआनंद कर रहे थे। गीत सुनकर उसी समय देवानंद ने सोच लिया था कि जब कभी वह अपनी निर्देशित फिल्म बनाएंगे नीरज उसके गीत लिखेंगे। इस तरह नीरज और देवानंद का 46 वर्ष पुराना साथ रहा। फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ में उन्होंने पहला गीत..रंगीला रे.. लिखा। यह गीत देवानंद का लाइफ टाइम पसंदीदा गीत रहा। इस बात का जिक्र खुद देवानंद ने अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में भी किया है।

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