अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा है कि मुसलमानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीकार कर लिया है। हमें वास्तविकता का सामना करना चाहिए। क्या इस वास्तविकता को नकारा जा सकता है कि मोदी के कार्यकाल में अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भारत के प्रभाव में वृद्धि हुई है। उन्होंने मुस्लिमों को वर्तमान सरकार की अनदेखी न करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि मुस्लिम ऐसा करेंगे तो यह उनके लिये घातक होगा।
दिल्ली में आरएसएस की रोजा इफ्तार पार्टी में शामिल होने पर चौतरफा आलोचनाओं से घिरे कुलपति ने अचानक पलटवार कर दिया है। खास बात ये है कि वीसी का ‘मोदी प्रेमी’ बयान ईद से ठीक पहले चांद रात पर उस वक्त आया है। जब एक दिन पहले ही नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को हटा कर उनकी जगह प्रकाश जावड़ेकर को इस महत्वपूर्ण मंत्रालय का कबीना मंत्री बनाया है। गौर हो कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का एएमयू छात्र संघ और यहां के अधिकांश छात्र शुरुआत से ही विरोधकर रहे हैं।
कुलपति ने कहा कि उन्होंने काफी सोच विचार के बाद आरएसएस के रोजा इफ्तार में जाने का फैसला किया। सर सैयद ने समय की नब्ज को पहचान कर भारत के मुसलमानों के विकास के लिये ब्रिटिश सरकार से मेलमिलाप कर एएमयू की स्थापना कराई थी। उस वक्त उन्हें भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। हमें सभी समुदाय के समझदार लोगों से वार्तालाप का दरवाजा खुला रखना चाहिये और मै भी यही कर रहा हूं।
उन्होंने कहा कि वह विवि की अनूठी पहचान की सुरक्षा के लिये बेहतर प्रयास कर रहे हैं। यदि फिर भी अल्लाह को स्वीकार न हो तो कम से कम यह संतुष्टि तो रहेगी कि उन्हाेंने अपने स्तर पर तमाम संभव प्रयास जारी रखे। कुलपति ने कहा कि जो लोग मुझे स्वार्थी एवं आरएसएस का एजेंट बता रहे हैं मै उनको विश्वविद्यालय आने का निमंत्रण देता हूं कि वह यहां आएं और विवि की भलाई के लिये वार्तालाप करें। अब समय आ गया है कि हम एकजुटता एवं व्यवहारिक माहौल तैयारकरें ताकि विवि दिन प्रतिदिन उन्नति कर सके।