अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने नियमों के साथ ही भारत सरकार के गर्वमेंट फाइनेंसियल रूल (जीएफआर 2005) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर 120 करोड़ रुपये फूंक दिए हैं। एएमयू के बदले ठेकेदारों के हितों को ज्यादा तरजीह दी गई।
निर्माण कार्यों के नाम पर पानी की तरह पैसे बहाए गए हैं। इसका खुलासा भारतीय लेखा परीक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ट (2014-15) में की है। गंभीर बात यह भी है कि एएमयू प्रशासन ने आडिट टीम के रिमाइंडर एवं आडिट मेमो का जवाब देने के बदले उसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया।
आडिट टीम ने सबसे बड़ा सवाल 75 करोड़ की लागत से 1500 लड़कियों के लिए बन रहे हॉल पर उठाया है। इसमें 12 वीं योजना के गाइड लाइन, सीपीडब्लू मैनुअल के उल्लंघन के साथ-साथ बिना बिल्डिंग कमेटी एवं फाइनेंस कमेटी के एप्रूवल के बिना काम कराने का दोषी पाया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आडिट टीम द्वारा उठाए गए सवालों पर कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही आडिट मेमो का जवाब दिया गया। इसी तरह के गंभीर सवाल 10.62 करोड़ की लागत से कैंपस डेवलपमेंट के नाम पर हुए काम पर भी उठाया गया है। यूजीसी के निर्देशों का उल्लंघन कर भवन निर्माण प्रोजेक्ट की राशि सड़क, इलेक्ट्रीसिटी, जल एवं नालों के निर्माण आदि पर खर्च कर दिया गया। यहीं नहीं एएमयू ने पीएमसी (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंसी) को 84.32 लाख अधिक चार्ज दिया। इसके रिकार्ड भी गायब हैं।
एएमयू प्रशासन ने रजिस्ट्रार आफिस एवं लाइब्रेरी के सीनियर अफसरों को दूसरे स्थान पर भेज दिया। इसके ऊपर भी आडिट टीम ने सवाल उठाया है। इसमें 59 लाख की वसूली रजिस्ट्रार, फाइनेंस आफिसर एवं लाइब्रेरियन के वेतन से करने की सिफारिश की है।
आडिट रिपोर्ट के संबंध में पूछे जाने पर अधिकारी जवाब देने से कतरा रहे हैं। फाइनेंस आफिसर का फोन नहीं उठ रहा। जनसंपर्क विभाग के एमआईसी डॉ. राहत अबरार ने फाइनेंस आफिसर से बात कर बताया कि ऐसी शिकायतें आती रहती हैं। आडिट टीम को इसका जवाब दे दिया जाएगा। जबकि आडिट रिपोर्ट में अलग-अलग मामलों में बार-बार कहा गया है कि एएमयू द्वारा रिमाइंडर या आडिट मेमो का जवाब नहीं दिया गया। रिपोर्ट को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं यूजीसी में आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।