भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक डॉ. जकिया सोमन ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोगों को शर्म से डूब मरना चाहिए। उन्हें पता नहीं है कि वर्ष 2016 में जी रहे हैं। मध्यकालीन मानसिकता का समय खत्म हो गया है।
डॉ. सोमन बुधवार को एएमयू में आयोजित एक कार्यशाला में शामिल होने अलीगढ़ आई थीं। अमर उजाला को उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कोलकाता सम्मेलन में तीन तलाक एवं मुस्लिम कानून में सुधार से इंकार कर दिया गया। डॉ. सोमन ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड वाले ओहियात का प्रस्ताव पास करते हैं।
अब उनका वजूद नहीं बचेगा। लोकतंत्र में उनकी बात सुनने को कौन तैयार है। जनजागृति एवं जानकारी का अभाव है। ये लोग गलत बातें बताकर पितृ सत्ता वाले बात करते रहेंगे। अब लग रहा है बदलाव आएगा, इसलिए लॉ बोर्ड के मौलाना बौखलाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि तीन तलाक एवं मुस्लिम लॉ में सुधार होना चाहिए।
हिंदू मैरिज एक्ट, उत्तराधिकार एक्ट की मुस्लिम महिलाओं के लिए भी शादी की उम्र, तलाक का तरीका, मेहर की रकम आदि को कानूनी रूप देना चाहिए। कानून में ये सब बातें नहीं लिखे जाने के कारण मौलाना इसका दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि आज की पढ़ी लिखी छात्राएं एवं महिलाएं बदलाव के लिए तैयार हैं। आज हर मुसलमान चाहता है कि बदलाव हो और औरतों को सम्मान एवं समानता के साथ जीने का मौका मिले।