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शहर में लगी मूर्तियों को लेकर नगर निगम चौकन्ना

Sat, 10 Mar 2018 02:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
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कंट्रोल रूम चौराहे पर लगी कर्पूरी ठाकुर की मूर्ति। - फोटो : अमर उजाला
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देश के विभिन्न हिस्सों में महापुरुषों की मूर्तियों को लेकर बनी स्थिति के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगी मूर्तियों को लेकर नगर निगम चौकन्ना हो गया है। शहर में चौराहों और अन्य स्थानों पर लगी मूर्तियों की देखभाल को सघन निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए अनौपचारिक तौर से एक व्यक्ति को वहीं आसपास रहकर नजर रखने के लिए कहा गया है।
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शहर में सासनी गेट चौराहा, गांधी पार्क चौराहा, अग्रसेन चौक, सुभाष चौक, स्टेट बैंक तिराहे पर, पुलिस कंट्रोल रूम के सामने, तस्वीर महल सहित अन्य स्थानों पर महापुरुषों की मूर्तियां लगी हुई हैं। त्रिपुरा में पिछले दिनों लेनिन की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने के बाद अलग-अलग स्थानों पर मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएं हुई हैं। कुछ दिन पहले स्टेट बैंक मुख्य शाखा के सामने डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया था, जिसके बाद हंगामा हुआ था और प्रतिमा का मरम्मत करायी गई थी।

अब नगर निगम ने इन प्रतिमाओं की निगरानी बढ़ा ती है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार सिन्हा कहते हैं कि सिर्फ प्रतिमाएं ही नहीं बल्कि पार्क, उनकी बाउंड्री, पेड़ पौधे आदि की सुरक्षा के लिए भी नगर निगम तत्पर है।
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पुलिस और खुफिया तंत्र भी सतर्क
शहर में विभिन्न स्थानों पर लगी मूर्तियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस और खुफिया तंत्र भी चौकन्ना हो गया है। पुलिस ने मूर्तियों के आसपास रहने वाले, ठेल ढकेल लगाने वाले व अन्य लोगों को कहा है कि अगर वह मूर्तियों के पास किसी तरह का कोई जमावड़ा देखें या किसी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि देखें तो वह उन्हें सूचित करें।  

मूर्तियों को तोड़ना हमारी संस्कृति नहीं : प्रज्ञा प्रबोध
प्रज्ञा प्रबोध वैचारिक मंच ब्रज प्रांत के प्रांतीय संयोजक डॉ. वीपी पांडेय ने कहा है कि त्रिपुरा की घटना के बाद प्रतिक्रिया स्वरूप कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा मेरठ में डा. भीमराव आंबेडकर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करना एक उन्मादी कृत्य है। जिसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। त्रिपुरा की अभूतपूर्व विजय के बाद वामपंथी शासन से पीड़ित कुछ अति उत्साही लोगों ने बुलडोजर से लेनिन की मूर्ति को ढहा जरूर दिया, लेकिन इसे उचित ठहराना गलत होगा। माना कि रूसी क्रांति के सूत्रधार लेनिन हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं, बावजूद इसके उसकी मूर्ति को क्षतिग्रस्त करना हमारी संस्कृति के खिलाफ है। त्रिपुरा में हमने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विशुद्ध भारतीय विचार की प्रभावशीलता से वामपंथ के अभारतीय विचार को पराजित किया है। इस वैचारिक रण में मूर्ति भंजन जैसे कृत्य की कोई जगह नहीं है। 
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