भारी हंगामे, नोकझोंक, टकराव और अव्यवस्था के बीच नगर निगम बोर्ड की बोर्ड की बैठक में वित्तीय वर्ष 2018-19 के मूल बजट के पारित होने का दावा किया गया है। इससे पूर्व बजट में पूरा विवरण नहीं दर्शाए जाने पर भड़के पार्षदों ने मूल बजट की प्रतियां फाड़ीं। कुछ पार्षदों ने सदन में लगे माइक उखाड़ कर पटक दिए। बोर्ड बैठक में सफाई कर्मचारी संघ के नेताओं के सदन में घुसने पर भी जमकर हंगामा हुआ और टकराव की स्थिति बनी। एक बार पार्षद और नगर निगम कर्मचारियों के बीच तो एक बार पार्षद आपस में ही आमने-सामने आ गए। शाम तक चली बैठक में कई बार हंगामे के हालात बने और सदन की गरिमा तार तार हुई। बजट से पहले शहर की जन समस्याओं पर पार्षदों ने अधिकारियों से जवाब मांगा तो वह संतोष जनक उत्तर नहीं दे सके।
मंगलवार को महापौर मो. फुरकान की अध्यक्षता में पूर्वाह्न 11 बजे बोर्ड की बैठक शुरू हुई। शुरू में ही कार्यकारिणी के उप सभापति ठा. पुष्पेंद्र सिंह जादौन ने स्पष्ट किया कि बजट पर चर्चा बाद में होगी पहले शहर की जन समस्याओं पर चर्चा होगी। इसके बाद महिला पार्षदों को सबसे पहले अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। महिला पार्षदों ने अपने क्षेत्र में सफाई, पेयजल और पथ प्रकाश की समस्या की बात रखी।
इसका संतोष जनकर उत्तर नगर निगम अधिकारी नहीं दे सके। इसके बाद उठाए गए ठेकों, कार्यों के न होने, पार्षदों की बात न सुनने, ठेका सफाई कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताएं, नाला सफाई गैंग के भुगतान में अनियमितताओं की बातें उठीं। भोजन अवकाश के बाद एक बार फिर से सदन की बैठक हुई तो पार्षद पुष्पेंद्र जादौन और वीरेंद्र सिंह के ही लगातार संबोधन से नाराज एक पार्षद ने माइक उखाड़ कर फेंक दिया। इसी के बाद बजट पास, बजट पास के नारे लगाते हुए बजट के पारित होने का दावा कर दिया गया।
सफाई और पेयजल व्यवस्था से कोई संतुष्ट नहीं
बोर्ड बैठक में एक भी पार्षद सफाई और पेयजल की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं रहे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी और जलकल विभाग के अधिकारी पार्षदों के सवालों के निशाने पर रहे। वार्ड संख्या 20 की पार्षद आशा गौतम ने कहा कि उनके क्षेत्र में सफाई और सीवरेज की परेशानी है। एटूजेड कूड़ा नहीं उठाता है। नाला सफाई की जानकारी उन्हें नहीं दी जाती। वार्ड संख्या 9 की नीलम रानी ने कहा कि उनके क्षेत्र में सफाई का संकट है। पार्षद अलका गुप्ता ने कहा कि उनके यहां कितने सफाई कर्मचारी हैं, जानकारी नहीं दी जाती। नियमित सफाई नहीं होती है। शिकायत करो तो आ जाते हैं। उनके क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों को आईकार्ड दिए जाएं। इससे स्थायी और अस्थायी सफाई कर्मचारियों में अंतर पता लग सके। वार्ड संख्या 5 की संगीता ने कहा कि उनके बराबर में ही फैक्ट्री है जिसका जेनरेटर प्रदूषण फैलाता है। इसके चलते कई बार करंट तक आ जाता है। वार्ड संख्या 3 की पिंकी ने पेयजल समस्या की बात कही। वार्ड संख्या 58 की पार्षद नफीस शाहीन ने कहा कि उनके क्षेत्र से लगातर स्ट्रीट लाइटें उतारी जा रही हैं। यह कौन हैं और क्यों उतार रहे हैं? इसका पता ही नहीं चलता है। वार्ड संख्या 24 की विमलेश ने क्षेत्र में लाइटें, सड़कों और गंदगी की समस्या रखी। वार्ड संख्या 67 से रुखसाना ने सफाई और अधिकारियों के फोन नहीं उठाने की बात कही।
स्मार्ट सिटी के लिए फूटी कौड़ी नहीं
नगर निगम के इस बजट में स्मार्ट सिटी के लिए प्रस्तावित व्यय में राशि शून्य दर्शायी गई है। बजट का विवरण देते हुए उल्लेखित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1.60 करोड़ रुपये व्यय का विवरण था। इस मद में दिसंबर 2017 तक 65.03 लाख रुपये खर्च हुए। स्मार्ट सिटी कंपनी का गठन हो जाने के बाद अनुदान की अवशेष धनराशि कंपनी के खाते में हस्तांतरित की जानी है। इस बात को ध्यान रखते हुए मूल बजट में इस मद में राशि शून्य अंकन की जाती है।
घोटाला शब्द पर भड़के निगम कर्मचारी
अलीगढ़। सदन अध्यक्ष महापौर मो. फुरकान ने जनसमस्याओं पर चर्चा की इजाजत देकर पार्षदों के गुस्से को शांत किया। पार्षद वीरेंद्र सिंह ने 11 घोटाले खोलने की चेतावनी दी। उन्होंने पार्किंग शुल्क के नाम पर हो रहे घोटाले पर कहा कि यह शुल्क वसूली पार्किंग स्थल से हो सकती है, लेकिन यह वसूली ठेके पर दे दी, जबकि पार्किंग स्थल की नियमावली के अनुसार मानक पूरे नहीं किए। उन्होंने इसे घोटाला बताया तो निगम कर्मचारियों ने कड़ी आपत्ति जतायी। निगम कर्मचारी विजय गुप्ता ने यह प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित होने और स्टे न मिलने की जानकारी दी। बताया कि इसके चलते नगर आयुक्त के निर्देश पर वसूली बंद है। ऐसे में घोटाला कहां हुआ? इस पर पार्षदों ने कड़ा एतराज जताया, लेकिन वीरेंद्र सिंह ने मामले की जांच कराने की खुली चुनौती दे दी।
‘बैठक बजट को लेकर थी, लेकिन सभी ने जनता की समस्याएं भी रखीं और सदन ने इसका संज्ञान भी लिया। जल्द से जल्द इनका समाधान किया जाएगा। सहमति से बजट पास हो गया है अब विकास कार्यों को गति मिलेगी’
डॉ. संजीव सिन्हा, सचिव, नगर निगम बोर्ड।
‘मैंने स्पष्ट कहा है कि जब तक सभी आय और व्यय का पूरा विवरण पार्षदों को उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तब तक मैं बजट को अपनी सहमति नहीं दूंगा। मेरा विरोध जारी रहेगा।’
ठा. पुष्पेंद्र जादौन, उप सभापति, नगर निगम कार्यकारिणी।
बोर्ड बैठक के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु
180 ठेका सफाई कर्मचारियों की भर्ती का मुद्दा गूंज। उप सभापति पुष्पेंद्र जादौन समेत पार्षद सद्दाम और अन्य पार्षदों ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए। आरोप लगा कि भर्ती के मानक पीछे छोड़ दिए गए। पार्षदों को विश्वास में नहीं लिया गया।
समस्याओं के संबंध में निगम से सही उत्तर न मिलने पर पार्षद अनिल सेंगर नाश्ते की प्लेट देख कर भड़क गए और बोले कि 100-200 रुपये के कामों के लिए नगर निगम के पास पैसा नहीं है। नाश्ते के लिए पैसा कहां से आ गया? इसलिए हम नाश्ते का बहिष्कार करते हैं।
पार्षद संजय शर्मा ने सासनी गेट चौराहे से लेकर रूसा हास्पिटल तक के निर्माण के संबंध में सवाल पूछे। उन्होंने निर्माण विभाग से पूछा कि काम 20 फीसदी भी नहीं हुआ, भुगतान 75 फीसदी कर दिया? इस पर जवाब दिया गया निर्माण सामग्री खरीदी गई थी उसके सापेक्ष भुगतान किया गया था, लेकिन पार्षद ने बताया कि वह सामग्री तो चोरी हो गई है। इसके बाद रनिंग भुगतान पर रोक लगाने की पार्षदों ने मांग कर दी।
सदन में नगर सफाई मजदूर संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप भंडारी आ गए और महापौर को ज्ञापन दिया। इस रवैये पर सभासद भड़क गए। इससे पहले नगर सफाई मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने सदन में प्रवेश किया था।