अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के भाषा विज्ञान विभाग में ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ता चार्ल्स एस. थॉमसन ने कहा कि बहुभाषिकता कमजोरी नहीं, हमारी ताकत है। वह बुधवार को भाषा विज्ञान विभाग में संचार माध्यमों, फिल्मों और प्रसारण मंचों में बहुभाषिकता : अवसर, चुनौतियां और नई संभावनाएं विषय पर आयोजित विशेष संगोष्ठी में बोल रहे थे।
थॉमसन ने हिंदी में बोलते हुए कहा कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म ने भाषाओं के प्रसार और लोगों को अपनी मातृभाषा के माध्यम से जोड़ने के अवसरों को और बढ़ाया है। उन्होंने लोगों से घर में अपनी मातृभाषा बोलने और क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने पर जोर दिया। भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एमजे वारसी ने कहा कि भारत स्वाभाविक रूप से एक बहुभाषी देश है।
कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए देश में विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। संचालन डॉ. शमीम फातिमा ने किया, जबकि डॉ. नोमान ताहिर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
फिल्मों में भाषाई विविधता कहानी को देती है नई पहचान : चार्ल्स
चार्ल्स एस. थॉमसन ने कहा कि फिल्मों में विभिन्न भाषाओं और बोलियों का इस्तेमाल केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक विविधता को सामने लाने का प्रभावी तरीका है। उन्होंने कहा कि बहुभाषी फिल्में अलग-अलग भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के दर्शकों को आपस में जोड़ने का काम कर सकती हैं।