इंतजार की घड़ियां खत्म। चांद का दीदार हो गया। जामा मस्जिद की ऊंची मीनार पर लगा बल्ब जल गया। सायरन बज गया। गोला छूट गया। चांद की तस्दीक शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने की। चांद देखते ही सबने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। इशा की नमाज के बाद तरावीह की नमाज पढ़ी गई। रमजान का पहला रोजा आज है। रविवार को सुन्नी का इफ्तार का वक्त शाम 7:10 बजे व शिया का 7:16 बजे है।
शनिवार को मगरिब नमाज के बाद शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने चांद की तस्दीक की। इसके बाद मीनार पर लगा बल्ब जला दिया गया। शाम साढ़े सात बजे जामा मस्जिद से गोला छोड़ दिया गया, ताकि लोगों को पता चल जाए कि चांद दिख गया है और अगले दिन से रोजा शुरू हो रहा है। शुक्रवार को चांद नहीं दिखा था। शनिवार को चांद दिखने की उम्मीद जताई गई थी।
लिहाजा, लोगों ने अपनी छतों से चांद का दीदार किया। चांद देखने के बाद शुरू हो गया रमजान मुबारक का सिलसिला, जो जमीन से सोशल मीडिया तक जारी रहा। इशा की नमाज के बाद मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। पठान मोहल्ले में अमानउल्ला खान के नूर मंजिल पर पांच दिन की तरावीह की नमाज पढ़ी जा रही है।
रमजान के लिए दिए गए कड़े निर्देश
अलीगढ़। रमजान के दौरान सफाई और पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली है। रमजान में विशेष सफाई के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। इस संबंध में नगर निगम द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं के प्रभारी नगर आयुक्त ऋषिकेश सिंह ने अधीनस्थों के साथ निरीक्षण किया।
प्रभारी नगर आयुक्त ऋषिकेश सिंह ने अधीनस्थों के साथ शहर में घूम-घूमकर निरीक्षण किया। उन्होंने ऊपरकोट चिराग चियांन, हाथी वाला पुल, शाहजमाल, खैर रोड में बनी हुई मस्जिदों के आसपास सफाई, पेयजल और पथ प्रकाश व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर संबंधित स्वच्छता निरीक्षकों को कड़ी हिदायत दी कि रमजान महीने में मस्जिदों के आस-पास सफाई की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। इसके साथ-साथ मुख्य मार्गों, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में सफाई, चूना, झाड़ू कूड़ा उठाने की विशेष व्यवस्था की जाए। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और प्रभारी ने भी सिविल लाइन क्षेत्र में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों जमालपुर, केला नगर, मेडिकल रोड, अमीर निशा, मैरिज रोड आदि क्षेत्रों में बनी मस्जिदों के आस-पास सफाई की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर संबंधित स्वच्छता निरीक्षक को साफ -सफाई की विशेष व्यवस्था कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शाम की पारी में तराबीह होती है। रोजेदारों को बेहतर साफ सफाई उपलब्ध कराई जाए।
मधुमेह रोगी पहले खुद को करें तैयार
मधुमेह रोगी रोजे के लिए पहले खुद को तैयार करें। रोजा रखने से आध्यात्मिक सुख व आत्म विश्वास का सृजन होता है।
ये बातें एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के राजीव गांधी सेंटर फॉर डायबिटीज एंड इंडोक्रोनोलोजी के डायरेक्टर डॉ. शीलू शफीक सिद्दीकी ने कहीं। कहा कि मधुमेह के रोगियों के चिकित्सकों की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने मरीजों को पहले रोजे के लिए तैयार करें और उन्हें सही परामर्श व चिकित्सकीय सहायता, योजनाबद्ध तरीके से ग्लूकोज की मात्रा को व्यवस्थित रखने में उनकी सहायता करें। वह अपने मरीजों को बताएं कि किस प्रकार हाइपोग्लाईसीमिया के खतरे को कम करते हुए मुंह से अथवा इंजेक्शन द्वारा मोलीक्यूल्स लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सहरी और इफ्तार के समय फल खाएं, तरल पदार्थ लें और तली हुई चीजों का बहुत ही कम मात्रा में सेवन करें।
वहीं एमएयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के प्रो. एसए आजमी ने कहा कि मिर्गी के मरीज को रोजा रखने से डिहाइड्रेशन व रक्त में शुगर कम होने के चलते दौरे पड़ने की संभावना बनी रहती है। इसलिए, इन्हें सावधानी की आवश्यकता है। हालांकि, कोई डरने की बात नहीं है।
गैर जरूरत की चीजों पर भी जकात वाजिब
इकराम वारिस
अलीगढ़ । जकात किस पर वाजिब है ? रोजा तोड़ने पर शरई हुक्म क्या है ? ईद की नमाज में क्यों होता है नमाजी का इंतजार? समेत कई मसलों पर शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद से अमर उजाला ने बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश।
सवाल : जकात किस पर वाजिब है?
जवाब : जकात हर उस चीज पर वाजिब है, जो आपके पास गैर जरूरत की चीजें हैं। मसलन, दो बाइक हैं, एक इस्तेमाल नहीं हो रही तो उस बाइक पर जकात वाजिब है। साढ़े सात तोला सोना या साढ़े 52 तोला चांदी या इतनी रकम पर ढाई फीसदी जकात देना है। मसलन, एक हजार पर ढाई सौ रुपये।
सवाल : सदका कितना और कब देना चाहिए?
जवाब : सदका हर शख्स को पौने दो सेर आटा या 40 रुपये देना होता है। रमजान की 29वीं शब को देना बेहतर होगा, ताकि गरीब लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
सवाल : रोजा तोड़ने पर शरई हुक्म?
जवाब : रोजा तोड़ने पर कफ्फारा करना होगा। एक रोजे के एवज में 60 रोजे रखने होंगे।
सवाल : ईद की नमाज में नमाजी का इंतजार क्यों ?
जवाब : ईद की नमाज में नमाजी का इंतजार इसलिए किया जाता है, क्योंकि इस नमाज का न तो बदल है और न ही कजा। बाकी नमाज का बदल व कजा है।
सवाल : अलविदा छुट्टी रद किया जाना मुनासिब है?
जवाब : अलविदा की छुट्टी रद होना मुनासिब नहीं है, इसका मलाल है। अलविदा जुमा बाकी जुमे का सरदार है। सरकार को इसका ख्याल रखना चाहिए।