कहानी के पीछे की कहानी: आखिर हुआ क्या था?
यह पूरा मामला इग्लास क्षेत्र के 'सहारा' गांव का है। पीड़ित पिता के मुताबिक, कहानी की शुरुआत 7 जून की सुबह हुई थी। सुबह साढ़े सात बजे हम लोग खेत में खरबूजा तोड़ रहे थे। तभी अचानक मेरी हाईस्कूल पास बिटिया लापता हो गई। जब काफी दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला, तो मैंने शक के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी। बस, इसी बात पर सांसद जी का फोन आ गया और वह मुझे ही डांटने लगे।
किसने क्या कहा?
इस मामले के सामने आते ही बयानों का दौर शुरू हो गया है और हर पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहा है।
भाजपा पक्ष (बचाव में उतरे जिलाध्यक्ष)
भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला ने इस ऑडियो को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है, यह ऑडियो पूरी तरह राजनीतिक द्वेष भावना से वायरल किया गया है। सांसद जी ने तो खुद बिटिया की बरामदगी के लिए एसएसपी और एसपी देहात को फोन किया है। गांव में एक धार्मिक स्थल को लेकर राजनीति चल रही है, और कुछ लोग इस पीड़ित पिता का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गांव के प्रधान (सांसद पर पलटवार)
सहारा गांव के प्रधान संजय कुमार ने सीधे सांसद पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, एक गरीब ब्राह्मण पिता की बेटी हफ्तेभर से गायब है और उसे न्याय दिलाने के बजाय धमकाया जा रहा है कि रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई? हैरान करने वाली बात यह है कि सांसद के पास बैठकर जो व्यक्ति बात कर रहा है, वह खुद इस मुकदमे में नामजद आरोपी है।
पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में
इग्लास के सीओ कमलेश कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा, मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। लड़की की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। हमें कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और जल्द ही लड़की को बरामद कर लिया जाएगा। आरोपियों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) भी खंगाली जा रही है।
एक तरफ पुलिस जल्द बरामदगी का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ इस वायरल ऑडियो ने कानून-व्यवस्था और नेताओं के रवैये पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। देखना यह होगा कि इस सियासी घमासान के बीच उस बेबस पिता को उसकी बेटी कब तक वापस मिलती है।
नोट: वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अमर उजाला नहीं करता है।