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50 हजार लोगों की पीड़ा: 20 कालोनियों के पास से अभी नहीं हटेगा कूड़े का पहाड़, सिस्टम की नाकामी सहनी पड़ेगी

Mon, 07 Oct 2024 03:09 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ नगर निगम के खुद अधिकारी भी यहां ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाते। अब जरा सोचिए कि इस कूड़े के पहाड़ के आसपास बसीं कृष्णा धाम, पुष्प विहार, ब्रजधाम, गंगाधाम, लोधी विहार, लक्ष्मीनगर, शिव विहार, तुर्कमान गेट, एडीए कालोनी, सासनी गेट, भुजपुरा, कमेला रोड, बाबरी मंडी, जयगंज और पीपल वाली गली समेत करीब बीस इलाकों के लोग कैसे रहते होंगे। 
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मथुरा रोड स्थित एटूजेड प्लांट में पड़ा कूड़े का ढेर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ के मथुरा रोड पर बसीं तकरीबन 20 कालोनियों के लिए मुसीबत बना कूड़े का पहाड़ फिलहाल हटने वाला नहीं है। क्योंकि निगम के पास अभी इसे हटाने का कोई प्लान ही नहीं है। 6 अक्टूबर को नगर निगम के अधिकारी यहां पहुंचे जरूर लेकिन दुर्गंध कम करने का ही उपाय ढूंढते रहे। तय हुआ कि रोजाना सुबह शाम कीटनाशकों का छिड़काव किया जाएगा। दुर्गंध कम करने के लिए भी कुछ दवाएं का घोल बनाकर यहां डाला जाएगा। कुल मिलाकर पचास हजार लोग अभी सिस्टम की नाकामी को सहेंगे।

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6 अक्टूबर को अमर उजाला के अंक में 50 हजार लोगों की पीड़ा... कूड़े का पहाड़, सांसद, विधायक, महापौर नहीं ले रहे हाल शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। इस खबर का प्रकाशन होने के बाद नगर निगम का अमला एटुजेड के प्लांट पर पहुंच गया। स्थिति यह थी कि खुद अधिकारी भी यहां ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाए। अब जरा सोचिए कि इस कूड़े के पहाड़ के आसपास बसीं कृष्णा धाम, पुष्प विहार, ब्रजधाम, गंगाधाम, लोधी विहार, लक्ष्मीनगर, शिव विहार, तुर्कमान गेट, एडीए कालोनी, सासनी गेट, भुजपुरा, कमेला रोड, बाबरी मंडी, जयगंज और पीपल वाली गली समेत करीब बीस इलाकों के लोग कैसे रहते होंगे। 

6 अक्टूबर को निगम के अफसरों ने प्लांट प्रोसेसिंग यूनिट और कूड़े का पहाड़ देखा और यहां से उठने वाली दुर्गंध को लेकर कर्मचारियों से हर आठ घंटे में रिपोर्ट देने को कहा है। प्लांट हेड समय सिंह को सुबह और शाम कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कूड़े के पहाड़ पर कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुर्गंध की तीव्रता कम की जा सके। अफसरों की टीम के साथ प्लांट प्रोसेसिंग यूनिट और कूड़े का पहाड़ देखने पहुंचे अपर नगर आयुक्त ने सुबह शाम कीटनाशकों के छिड़काव के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं सुबह से लेकर शाम तक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है जो यह देखेंगे कि दुर्गंध कितनी कम हुई है।

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अब कितनी भी जल्दी कर लें..निस्तारण में लगेंगे तीन साल

हालांकि इस कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए नगर निगम स्तर से प्रयास हो रहे हैं। टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है। मगर अब कितनी भी जल्दी कर लें तीन साल से पहले इस कूड़े का निस्तारण संभव नहीं है। यहां साढ़े 5 लाख टन कूड़ा पड़ा है। हर रोज मात्रा बढ़ती ही जा रही है। मेयर प्रशांत सिंघल ने बताया कि सप्ताह भर में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। लेकिन फिर भी तीन साल तो लग ही जाएंगे।

ढेर लगता रहा, निस्तारण नहीं कर पाए
कूड़े का ढेर लगता रहा लेकिन निगम प्रशासन निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर पाया। यहां 525 टन कूड़ा रोज पहुंच रहा है जबकि प्लांट की क्षमता 220 टन कूड़ा निस्तारण की। लेकिन प्लांट की क्षमता बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इतना ही नहीं कहीं दूसरी जगह भी तलाशी जानी चाहिए थी लेकिन उसके लिए भी कोई प्रयास नहीं हुआ। हालांकि अब ग्रामीण क्षेत्र में शहर से बाहर जहां कोई आबादी न हो वहां जमीन तलाशी जा रही है। वहां भी कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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