प्रदेश ने ऐसे सुधारी स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में बीते वर्षों में मलेरिया जांच शिविर, घर-घर सर्वे, समय पर दवा वितरण, फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और जागरूकता अभियानों का असर दिखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से इन मामलों में कमी आई है। नई दिल्ली के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम की रिपोर्ट बताती है कि साल 2021 में प्रदेश में 42.45 लाख नमूनों की जांच में 1464 मरीज संक्रमित मिले।
2022 में 503, 2023 में 1305, 2024 में 998 और 2025 में 649 मरीज सामने आए। बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, खीरी (लखीमपुर), लखनऊ, पीलीभीत और सोनभद्र के अलावा कानपुर नगर, संभल, गौतमबुद्ध नगर, बाराबांकी, औरैया, रामपुर, बुलंदशहर, मिर्जापुर, मेरठ, प्रयागराज और गोरखपुर जिले पर सबसे अधिक फोकस है। आगरा और अलीगढ़ सहित 12 जिलों में मलेरिया का बहुत कम असर है।
एक मच्छर से लाखों तक पहुंच सकती है संख्या
मादा मच्छर का जीवन चक्र लगभग छह सप्ताह का होता है। इस अवधि में वह तीन से पांच बार अंडे देती है। हर तीन-चार दिन में खून चूसने के बाद वह अंडे देती है। एक बार में करीब 300 से 350 अंडे देती है। इनमें बड़ी संख्या जीवित बच जाती है और तेजी से नई पीढ़ी तैयार होती है। अनुकूल परिस्थितियों में कुछ ही समय में इनकी संख्या लाखों तक पहुंच सकती है।