72 साल पहले नईबस्ती मोहल्ले में बनी मस्जिद की चार फुट दीवार पीछे कर ली गई है, क्योंकि वह नाले पर बनी थी। मस्जिद कमेटी का मानना है कि कब्जे वाली जमीन पर नमाज पढ़ना मुनासिब नहीं लग रहा था। सफाई कर्मियों को सफाई करने में दिक्कत होती थी। ऐसे हालात में दीवार को नाले से पीछे करने का फैसला लिया गया। यही नहीं इस मोहल्ले में मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा भी है, जो कौमी एकता की मिसाल है।
नई बस्ती में वर्ष 1947 में मस्जिद की तामीर (निर्माण) की गई थी। हालांकि, जिन्होंने मस्जिद की तामीर कराई थी। वो अब दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार के लोग इस मस्जिद की देखभाल करते हैं। मस्जिद का एक हिस्सा नगर निगम के नाले पर था। यह बात कमेटी के लोगों को कचोटती रहती थी कि अवैध जगह पर नमाज मुनासिब नहीं है। इसके बाद आसपास के लोगों व मस्जिद के जिम्मेदारानों ने आपस में फैसला कर मस्जिद के एक हिस्से को तुड़वा दिया, जो चार फुट की जगह थी। टूटी जगह पर वजू खाना था, जहां लोग वजू करते थे। दीवार पीछे होने से नाला खुल गया, जहां अब आसानी से सफाई हो सकेगी। जिले का यह पहला मोहल्ला है, जहां मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा है और उसके मानने वाले भी हैं।
मस्जिद की दीवार पीछे होने से नाला पूरी तरह खुल गया है, जिसकी सफाई आसानी से होगी, प्रधानमंत्री की स्वच्छता के संदेश को बल मिलेगा।
- बब्लू अब्बासी, अध्यक्ष मस्जिद कमेटी
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कमेटी ने तय किया कि कब्जेवाली जगह पर नमाज पढ़ना मुनासिब नहीं है, क्योंकि इसे अवैध माना जाता है। इसलिए दीवार पीछे हटाने का फैसला किया गया।
- सरफराज अब्बासी, सचिव, मस्जिद कमेटी
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मुस्लिम समाज के लोगों ने एक बेहतर पहल की है। उम्मीद है कि इस कार्य से लोग प्रेरणा लेंगे, जिसकी प्रशंसा होनी चाहिए।
-कृष्ण कुमार अरोरा