एएमयू बना ‘हॉटस्पॉट’
एएमयू में अब तक 98 से अधिक प्रजातियां दर्ज हुई हैं। यहां घने पेड़, पुराने वृक्ष और खुले मैदान प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार के पक्षियों को अनुकूल वातावरण दे रहे हैं। पक्षियों की संख्या का सटीक आंकलन और जनता में पक्षियों के साथ सह-अस्तित्व की भावना एवं जागरूकता के लिए यह रिपोर्ट बहुत मायने रखती है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी प्रजाति हमारे शहर के किस क्षेत्र में फल-फूल रही है।
जवाहर पार्क: शहर का हरित फेफड़ा
शहर के मध्य स्थित जवाहर पार्क भी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बनकर उभरा है। सुबह के समय यहां जल स्रोतों और घने वृक्षों के आसपास विभिन्न प्रजातियां देखी जाती हैं। आंकड़े बताते हैं कि शहरी दबाव के बावजूद ग्रीन पॉकेट्स यानी हरित जेबें अभी भी जीवंत हैं। हालांकि पेड़ों की कटाई, कंक्रीटीकरण और जल स्रोतों का क्षरण लगातार बढ़ता गया तो यह संतुलन प्रभावित हो सकता है।
कौन-कौन सी प्रजातियां प्रमुख देखीं गई
गणना में कबूतर की संख्या सबसे अधिक रही। इनके अलावा, सफेद-आंख चिड़िया, चट्टानी सुर्ख चिड़िया, छोटी फाख्ता, ह्यूम की पत्तीचुंगी और हरी पत्तीचुंगी जैसी प्रजातियां दर्ज की गईं। सामान्य के अलावा यहां खाद्य श्रृंखला के ऊपरी स्तर के पक्षी भी दिखे। शिकरा और चितकबरा उल्लू की मौजूदगी बताती है कि परिसर में संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र सक्रिय है। वहीं चील, तोता, मैना, गौरैया, सात भाई और बुलबुल जैसी प्रजातियां भी दर्ज की गईं।