- वन विभाग की खैर रेंज में पौधरोपण के नाम पर नौ करोड़ का घोटाला करने का लगा था आरोप
- पूर्व डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी पर होगा मुकदमा, रिकवरी की भी तैयारी
जनपद में वन विभाग की खैर रेंज में पौधरोपण के नाम पर नौ करोड़ का घोटाला करने के आरोप में प्रदेश सरकार द्वारा निलंबित किए गए वीके मिश्रा के बाद अभी कई और अधिकारी-कर्मचारी इस कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। वीके मिश्रा के निलंबन की खबर पाते ही विभाग के अधिकारी औैर कर्मचारियों की दिलों की धड़कने तेज हो गई है। रविवार को कार्यालय बंद होने के बाद भी कई अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय पर पहुंचे और आपस में गुप्तगू की। अब सभी अपने-अपने तरीकों से जांच रिपोर्ट का पता लगाने में जुट गए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अन्य अधिकारी-कर्मचारी जो इस मामले में आरोपी बने थे। वह कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक से लेकर विभागीय दावपेंच खेल को बचाने की कसरत में लगे हैं। वहीं, गोलमाल के मुख्य आरोपी पूर्व डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी से विभाग रिकवरी कर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई करने की तैयारी में है। बता दें कि जून माह में सीएम योगी आदित्यनाथ से जनपद की खैर रेंज में पौधरोपण में करीब नौ करोड़ रुपये के घपले की शिकायत की हुई थी। शिकायत में कहा गया था कि विभागीय अधिकारियों ने एक निजी फर्म के साथ मिलकर कागजों पर ही पौधरोपण कर धन हड़प लिया है। मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार दुबे को मामले की जांच सौंपी गई थी। पांच दिन तक उनके नेतृत्व में प्रदेश भर से आईं पांच जांच टीमों ने इसकी जांच की थी।
जांच के दौरान चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए थे वीके मिश्रा
वन विभाग में घोटाले की जांच के दौरान वीके मिश्रा चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए थे। उन्होंने जांच में सहयोग भी नहीं किया था। इस बात से जांच टीमों की टेढ़ी निगाह शुरूआत से ही वीके मिश्रा पर थी। हालांकि वह आखिरी दम तक खुद को निर्दोष बताते रहे थे। मगर, ढाई माह बाद ही उनके राज से पर्दा उठ गया।
दो अफ सरों की रार ने खोला घोटाला
वन विभाग में इतने बड़े पैमाने पर हुए घोटाले की पटकथा एकाएक नहीं लिखी गई। इस घोटाले की शिकायत के पीछे दो अधिकारियों की करीब 11 माह पहले हुई आपसी रार वजह बनी। दरअसल, 2018 अक्तूबर में अकराबाद और विजयगढ़ का 559 हेक्टेयर वन ब्लाक की आरक्षित जमीन पर ग्रामीणों द्वारा कब्जा किए जाने का मामला खुला। इस मामले में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले की शिकायत की तत्कालीन खैर रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी अशोक कुमार निमेष को जमीन पर हुए कब्जे का दोषी ठहराकर डीएफ ओ श्रीधर त्रिपाठी ने उनके निलंबन की संस्तुति की थी। इसके बाद अशोक कुमार निमेष ने खैर रेंज में पौधरोपण के नाम पर होने वाले घोटाले की शिकायत शासन से की थी।
यह था मामला
डीएफ ओ श्रीधर त्रिपाठी और वन संरक्षक वीके मिश्रा पर आरोप लगा था कि उन्होंने खैर रेंज में 2018-19 में पौधरोपण कराने के नाम पर एक वन रक्षक और खैर की एक हार्टिकल्चर फ र्म के साथ मिलीभगत कर कागजों में पौधरोपण करवा दिया और करीब चार करोड़ का घोटाला किया। इसके साथ ही 2019-20 में खैर रेंज में ही पौधरोपण को गड्ढे खुदान और भरान के नाम पर वन रक्षक के साथ मिलकर साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया था।