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नाबालिग आरोपी की उम्र का होगा परीक्षण... सीओ बरला करेंगी विवेचना

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अकराबाद की किशोरी की हत्या में जेल भेजे गए नाबालिग की उम्र के प्रमाणपत्र पर खुद पुलिस को भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उसकी उम्र की सत्यता परखने के लिए मेडिकल बोर्ड से उम्र का सत्यापन कराया जाएगा। साथ ही इस मुकदमे की विवेचना अब सीओ बरला सुमन कनौजिया को सौंपी गई है। खुद उन्हें एसएसपी ने जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए हैं और प्रयास है कि इस मुकदमे का ट्रायल सत्र न्यायालय में कराया जाए।
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किशोरी की दुष्कर्म की कोशिश के दौरान हत्या में जेल भेजा गया नाबालिग आरोपी इस कदर शातिर दिमाग है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने पुलिस को लगातार 24 घंटे तक बरगलाया। कभी वह पुलिस के सामने घटना स्वीकार लेता था। कभी खुद चश्मदीद बनकर किसी अन्य पर आरोप लगा देता था। कभी कुछ भी बताने से मुकर जाता था।
वह तो बाद में साक्ष्य संकलन के बाद उसने जब चप्पलें बरामद कराईं तो पुलिस को पुख्ता हो गया कि हत्या इसी ने की है। जब उसकी उम्र का प्रमाणपत्र मांगा गया तो परिवार की ओर से एक आधार कार्ड दिया गया, जिसमें उसकी जन्म तिथि जनवरी 2004 अंकित है। जिसके अनुसार आरोपी 17 साल एक माह का माना जा रहा है। मगर उसकी कदकाठी देखकर नहीं लगता कि वह इस उम्र का होगा।
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इसी भ्रम को दूर करने के लिए उसकी उम्र का सत्यापन कराया जाएगा। चूंकि फिलहाल उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सुधार गृह भेजा गया है। इसलिए किशोर न्याय बोर्ड से उम्र सत्यापन की अनुमति ली जाएगी। इसके अलावा प्रयास किया जाएगा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर प्रवृत्ति के इस अपराध का ट्रायल सत्र न्यायालय में हो। इसके लिए पुलिस स्तर से ही न्यायालय से अनुरोध किया जाएगा कि इसे सामान्य जेल में रखकर ट्रायल भी सत्र न्यायालय या अधीन न्यायालय में कराया जाए।
- आरोपी की उम्र को लेकर अभी संशय है। इसलिए उम्र का निर्धारण कराया जाएगा। उसके साथ-साथ इस मुकदमे का विचारण तीन माह में शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा और न्यायालय से घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सत्र न्यायालय में विचारण का अनुरोध किया जाएगा। मुकदमे की विवेचना सीओ बरला को सौंप दी गई है। एसपी क्राइम इसकी मॉनीटरिंग करेंगे।
-मुनिराज जी, एसएसपी
मामा से की अकेले में बात, दिया पूरा भरोसा
एसएसपी मुनिराज जी से मिलने बृहस्पतिवार को किशोरी के मामा पहुंचे। उन्होंने मुकदमे में धारा घटने, बाल सुधार गृह भेजने आदि मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान अकेले में बातचीत करते हुए एसएसपी ने उन्हें समझाया कि आप कतई निश्चिंत रहें। किसी भी कीमत पर न तो धाराएं घटी हैं और न मुकदमे में कोई कमजोरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि मुकदमे में दुष्कर्म, हत्या, एससीएसटी एक्ट के साथ-साथ साक्ष्य मिटाने, और पॉक्सो एक्ट की धारा बढ़ाई गई है।
उम्र निर्धारण का प्रयास शुरू करा दिया गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद इसे सामान्य जेल में लाने का प्रयास होगा। साथ ही एससीएसटी धारा होने के कारण विवेचना सीओ स्तर के अधिकारी द्वारा की जा रही है। इसलिए किसी तरह की लापरवाही का मतलब नहीं बनता। करीब 15 मिनट की बातचीत के बाद मामा वहां से गए और एसएसपी ने उन्हें भरोसा दिया कि कभी किसी तरह की दिक्कत हो वे हमेशा परिवार के साथ हैं।
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