दीवार फांदकर विद्यालय में घुसते राज्यमंत्री।
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ग्रामीणों की शिकायत पर रविवार को सालपुर के सरकारी इंटर कॉलेज की हकीकत देखने पहुंचे राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर को गेट बंद मिला। कर्मचारी के नहीं पहुंचने पर वह दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हुए तो पांच कमरों की छत गायब, चाहरदीवारी टूटी और छात्रों के लिए शौचालय तक नहीं मिला। कॉलेज की बदहाली देखकर मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके से ही प्रिंसिपल और डीआईओएस को फोन कर पिछले 10 साल में मिले बजट और उसके खर्च का हिसाब तलब कर लिया।
दरअसल गांव सालपुर के सीआईएसएफ जवान विवेक डागुर की मौत पर परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे राज्यमंत्री से ग्रामीणों ने सरकारी इंटर कॉलेज की बदहाली की शिकायत की। ग्रामीणों की बात सुनकर मंत्री अचानक निरीक्षण करने निकल पड़े। रविवार होने के कारण इंटर कॉलेज में स्टाफ मौजूद नहीं था। गेट बंद मिला तो कर्मचारी को बुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद मंत्री दीवार फांदकर परिसर में पहुंच गए। परिसर में दाखिल होते ही अव्यवस्थाओं का पूरा ढांचा सामने था। पीछे की ओर कई कमरों की छत नहीं थी। बाकी भवन भी जर्जर हालत में मिला। चाहरदीवारी कई जगह टूटी थी और परिसर में ऊंची घास व झाड़ियां उगी थीं। विद्यार्थियों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं मिली। विद्यालय के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन को देखकर मंत्री ने इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना।
ये हालात देख राज्यमंत्री ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य चंद्रभान सिंह को फोन किया और साफ-सफाई व विद्यालय की बदहाली पर नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने डीआईओएस से बात कर विद्यालय की स्थिति बताई। साथ ही पिछले 10 वर्षों में कॉलेज को मिली धनराशि और उस पर हुए खर्च का पूरा हिसाब भी मांगा है।
305 बच्चे पंजीकृत, फिर भी सुविधाएं नदारद
विद्यालय में कक्षा छह से 12 तक 305 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। हालांकि रोजाना करीब 170 से 180 विद्यार्थी ही विद्यालय पहुंचते हैं। विद्यालय में छह शिक्षकों की भी कमी है। कार्यवाहक प्रधानाचार्य के अनुसार विद्यालय की मरम्मत और जरूरी सुविधाओं के लिए एस्टीमेट और जरूरतों की सूची पहले ही जिलाधिकारी को भेजी जा चुकी है।
दशकों से विवाद, नहीं बनी प्रबंधन समिति
कार्यवाहक प्रधानाचार्य चंद्रभान सिंह ने बताया कि मंत्री का फोन आया था और उन्होंने विद्यालय में साफ-सफाई को लेकर जानकारी ली। बजट की कमी के कारण वह स्तर पर काम नहीं करा पा रहे हैं। दशकों से चले आ रहे विवाद के कारण विद्यालय में प्रबंधन समिति भी नहीं है। इसकी देखरेख एसडीएम के स्तर से होती है।
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. ग्रामीणों की शिकायत पर विद्यालय पहुंचा था। जर्जर हालत देखकर मन बहुत दुखी हुआ। डीआईओएस से पिछले 10 वर्ष का लेखा-जोखा मांगा है। मूलभूत सुविधाएं तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। किसी भी कीमत पर बच्चों की शिक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। - सुरेंद्र दिलेर, राजस्व राज्यमंत्री