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गुजरात से लौटे श्रमिक घर वापसी पर हुए खुश

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श्रमिक ट्रेन से उतरकर इलाहाबाद जाने के लिए बस बस स्टैंड जाते मजदूर। - फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन में गुजरात में फंसे प्रवासी श्रमिकों की रविवार को घर वापसी हो गई। प्रदेश के विभिन्न जिलों के 3317 श्रमिक गुजरात के मेहसाना और राजकोट से आईं एक-एक स्पेशल ट्रेन के जरिये अलीगढ़ आए। यहां अलीगढ़ के 1235 श्रमिकों को आश्रय स्थल में भेजने के साथ ही अन्यों को उनके संबंधित जिलों के लिए रोडवेज और प्राइवेट बसों द्वारा रवाना कर दिया गया। मगर, पिछली दो बार की अपेक्षा इस बार बसों से श्रमिकों को घर भेजने में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया। बसों की कमी के चलते एक-एक बस में 40 से 50 श्रमिकों को भेजा गया। यह लापरवाही ऐसे समय में की गई है, जब प्रदेश के कई जिलों में प्रवासी श्रमिक कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।
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गुजरात के मेहसाना से सुबह पांच बजे आने वाली ट्रेन पांच बजे जंक्शन के प्लेटफार्म सवा सात बजे पहुंची। इस ट्रेन में अलीगढ़ सहित प्रदेश के कासगंज, एटा, हाथरस, आगरा, बागपत, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ जिले के 1726 श्रमिक आए। इसके बाद नौ बजे आने वाली स्पेशल ट्रेन एक बजे प्लेटफार्म पर पहुंची। इसमें से राजकोट से सवार होकर आए 1546 श्रमिकों को उतारा गया। दोनों ट्रेनों में अलीगढ़ के 500 के करीब श्रमिक रहे।
अलीगढ़ के श्रमिकों को कोल तहसीलों में बनाए आईटीएम कॉलेज आश्रय स्थल में भेजा गया। इस काम में जिला प्रशासन के पसीने छूट गए। दरअसल, पांच बजे आने वाली ट्रेन पहले से दो घंटे लेट आई। इधर, जंक्शन पर श्रमिकों को उतारने में समय लगा। इसके चलते जिला प्रशासन को काउंटर व्यवस्था में तब्दीली करनी पड़ी। काउंटरों को बंद कर दिया गया। ट्रेन से जिलावार श्रमिकों को उतारा गया। उन्हें सीधे बसों में भेजा गया। बसों में ही खाना-पानी दिया गया और गिनती की गई। इसके साथ ही मेहसाना से आई पहली ट्रेन के लेट होने के चलते राजकोट से आने वाली ट्रेन को रास्ते में कई बार रुकवाना पड़ा। पहली ट्रेन के खाली होने के बाद दूसरी ट्रेन को बुलाया गया।
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श्रमिकों को भीषण गर्मी में काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इधर, पिछली दो बार की व्यवस्था इस बार फेल हो गई। पहले तो श्रमिकों की संख्या के सापेक्ष बसों का इंतजाम नहीं हो सका। देर रात को आननफानन रोडवेज के अधिकारियों ने आसपास के जिलों से बसों का इंतजाम किया। इसके बाद भी बसों की कमी पड़ी तो रविवार को मौके पर ही 17 अनुबंधित बसों को लाना पड़ा। इस प्रकार करीब 90 बसों से श्रमिकों को रवाना किया गया। मगर, इस व्यवस्था के कारण सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गईं। बसों में निर्धारित 25 से 30 के बजाय 40 से 50 यात्रियों को बैठाकर रवाना किया गया। एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी के मुताबिक श्रमिकों को सकुशल उनके गंतव्यों को रवाना कर दिया गया। बसों की कमी को भी पूरा कर लिया गया था।
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