औषधि विभाग ने 18 दिन की छापेमारी के बाद नकली दर्द निवारक दवाएं बेचने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। इसमें फफाला बाजार के एक थोक विक्रेता को मुख्य आरोपी बनाया गया है। यह विक्रेता रुड़की में नामी कंपनी की नकली दवाएं बनवाकर आगरा में बेच रहा था।
छह मई को आगरा की एक मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा गया। वहां खरीद बिल से अधिक दवा बिक्री के बिल मिले। फर्म संचालक सुरेंद्र गुप्ता ने पूछताछ में अलीगढ़ के मयंक गुप्ता का नाम बताया। मयंक ने सुरेंद्र को मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया था। सुरेंद्र ने मुंबई से खरीदी 13610 टैबलेट का ब्योरा मयंक को दिया।
मयंक ने रुड़की की फार्मास्युटिकल्स फर्म के निदेशक अन्नू अरोड़ा और उनके भाई संयम अरोड़ा से संपर्क किया। मयंक ने उन्हीं के जरिये उसी बैच नंबर की नकली टैबलेट तैयार करवाईं। ये नकली दवाएं बस के माध्यम से आगरा भेजी गईं। नकली दवाओं के भुगतान के लिए हवाला का इस्तेमाल हुआ। एक साल में करीब 2.60 करोड़ रुपये की दवाएं खपाई जा चुकी हैं।
जांच और खुलासा
मयंक गुप्ता ने पहले पूछताछ में सुरेंद्र गुप्ता को ब्याज पर पैसे देने की बात कहकर गुमराह किया। टीम ने रुड़की में गूगल लोकेशन हिस्ट्री जांची। मयंक गुप्ता के रुड़की की फैक्ट्री में जाने के सबूत मिले। 14 मई को रुड़की में फार्मास्युटिकल्स फर्म पर छापा मारा गया। वहां नकली दवाओं के रैपर मिले, जिन पर एक विशेष डॉट था, जो असली टैबलेट में नहीं होता है।
कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस पर नोटिस
फर्म संचालकों ने मयंक के जरिये मिले ऑर्डर पर दवाएं बनाने की बात स्वीकारी। टीम ने 10 दवाओं के नमूने भी लिए हैं। इस मामले में सुरेंद्र गुप्ता, मयंक गुप्ता, अन्नू अरोड़ा और संयम अरोड़ा के खिलाफ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अलीगढ़ के औषधि निरीक्षक दीपक लोधी ने बताया कि मयंक गुप्ता को लाइसेंस को लेकर नोटिस जारी किया है। उसकी दुकान करीब 2011 से बंद है, जिस पर नगर निगम ने सील लगा रखी है।