अब मीनाक्षी ओवरब्रिज के सहारे बने रेलवे के पैदल पुल पर दुपहिया वाहन संचालित नहीं होंगे। गुरुवार को रेल प्रशासन ने इस संबंध में सख्त निर्णय लेकर दुपहिया वाहनों को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया है। लगातार ट्रेन की चपेट में आकर जान गवाने की घटनाओं को देखते हुए रेल प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है।
गुरुवार को यहां आईओडब्ल्यू के अधिकारियों के निर्देशन में आरपीएफ ने पैदल पुल पर चढ़ने वाले रास्ते पर दोनों ओर से लोहे के दो पोल जमीन में गाढ़ दिए और रास्ता ब्लाक कर दिया। अब सिर्फ पैदल लोग ही इस पुल पर चल सकेंगे।
कई दशक पहले मीनाक्षी पुल के स्थान पर एक फाटक हुआ करता था, जिसे शहरवासी खूनी फाटक के नाम से जाना करते थे। इस फाटक पर आए दिन रेल की चपेट में आकर लोगों की मौत होना आम बात थी। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे ने राहगीरों के लिए पुल का निर्माण किया।
इस पुल पर कुछ दिन तक तो हालात सही रहे। जैसे ही रेल पटरी के दूसरी ओर विकास हुआ तो यहां से दुपहिया वाहन चालकों ने निकलना शुरू कर दिया। ऐसा करने से वाहन चालकों का समय के साथ-साथ पेट्रोल भी बचने लगा। धीरे-धीरे इस पुल पर दुपहिया वाहन चालकों ने अवैध कब्जा कर लिया।
वहीं राहगीर फिर से पटरी क्रॉस करने को मजबूर हो गए। पिछले एक महीने में इस पुल के नीचे दस से ऊपर रेल हादसों में लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन सभी समस्याओं व पुल की जर्जर हालत को देखते हुए 31 मई के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से इसे प्रकाशित किया था।
वहीं, चंदनियां के सैनीकुंज निवासी अभिषेक कुमार शर्मा ने भी ट्वीट कर रेल अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया था। इस पर रेलवे के स्थानीय अधिकारियों को दुपहिया वाहनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए।
गुरुवार दोपहर को आईओडब्ल्यू की टीम, आरपीएफ प्रभारी नवल किशोर को लेकर वहां पहुंची, जहां टीम ने पुल के दोनों ओर लोहे के पोल लगाकर दुपहिया वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधि कर दिया।
हर दिन सैकड़ाें बाइक गुजरती हैं पुल से
इस पुल से कई सैकड़ा की तादाद में मोटर साइकिल चालकों का आवागमन रहता है। सुबह से लेकर शाम तक शहर का सबसे व्यस्ततम रहने वाला यह एक मात्र पुल था, जिस पर अवैध रूप से वाहन दौड़ रहे थे। इस कार्रवाई के बाद वाहन स्वामी थोड़े निराश तो लौटे, वहीं पैदल चलने वाले राहगीरों के चेहरे पर खुशी थी।
राहगीरों का कहना था कि जान खतरे में डालकर कौन पटरी क्रॉस करना चाहता है, लेकिन मोटर साइकिल चालक उन्हें निकलने नहीं देते थे। रेलवे ने यह बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। वहीं पटरी क्रॉस कर आने-जाने वालों को आरपीएफ ने हिदायत थी। साथ ही उन्हें समझाया कि यह पुल आज से आपके लिए ही है। जब भी दूसरी ओर जाना हो तो पुल का प्रयोग करें।