बीमारी एवं दुर्घटना में घायल होकर उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों का जीवन संकट में है। रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दूसरे दिन भी मेडिकल कॉलेज में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। पहले से भर्ती मरीज एवं उनके परिजन भी हड़ताल के कारण दहशत में है। चर्चा है कि रविवार सुबह एक मरीज की मौत हो गई।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में अलीगढ़ के अतिरिक्त हाथरस, एटा, कासगंज, मैनपुरी एवं बरेली आदि तक के गंभीर मरीज आते है। खासकर अलीगढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों में दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों को मेडिकल कॉलेज में ही उपचार के लिए भेजा जाता है।
पिछले दो दिन से रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण एक भी नए मरीज को भर्ती नहीं किया गया। रविवार को भी दूर-दूर से उपचार के लिए आए इमरजेंसी मरीजों को लेकर परिजन वापस चले गए। दिन में प्रॉक्टर प्रो. एम मोहसिन खान आरडीए पदाधिकारियों से मिलकर काम पर वापस लौटने की अपील की।
उन्होंने कहा कि हड़ताल से गरीब मरीजों को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है। लेकिन डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले लोगों की गिरफ्तारी नहीं होने तथा सुरक्षा अधिकारी को निलंबित नहीं किए जाने की नाराज रेजीडेंट डॉक्टरों ने रात में जीबीएम कर हड़ताल पर बने रहने का निर्णय लिया।
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर ने दोपहर में रविवार के अवकाश के बावजूद तमाम विभागाध्यक्षों एवं अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात पर चर्चा की। प्राचार्य ने आरडीए पदाधिकारियों से भी हड़ताल खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पूरे मेडिकल कॉलेज में सायरन लगवाया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसी तरह की अप्रिय घटना होने पर सायरन बजा दिया जाएगा और तमाम सुरक्षाकर्मी वहां पहुंच जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार की रात्रि में खैर के एक दो महीने के बच्चे की मौत उपचार के दौरान हो गया था। आरोप है कि आक्रोशित तीमारदारों ने रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. जफर इकबाल एवं डॉ. अम्मर जावेद की पिटाई कर दी। इसकी सूचना मिलने के बाद रेजीडेंट डॉक्टर शनिवार से कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए।
मारपीट करने वाले तीमारदारों की गिरफ्तारी की मांग
रविवार रात्रि में आयोजित जीबीएम में रेजीडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल पर बने रहने का निर्णय लिया। आरडीए उपाध्यक्ष डॉ. मुजाहिद अली खान ने बताया कि अब तक न तो आरोपी तीमारदारों की गिरफ्तारी हुई है और न ही सुरक्षा अधिकारी का निलंबन हुआ है। इसलिए कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
इधर प्रॉक्टर प्रो. एम मोहसिन खान का कहना है कि घटना के बाद दो सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है और एक को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है। गरीब मरीजों एवं मानवता को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों को हड़ताल वापस ले लेना चाहिए। हमलोग उनकी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करेंगे। जल्द ही मेडिकल कॉलेज में सायरन लगा दिया जाएगा।
डॉक्टरों ने मार डाला बच्चा, अब दबाव बना रहे
अलीगढ़ । जेएन मेडिकल कॉलेज में बच्चे की मौत और डॉक्टरों द्वारा हड़ताल के मामले में रविवार देर शाम नया मोड़ आ गया। यहां मृत बच्चे के परिजनों ने कई दर्जन लोगों संग एसएसपी लव कुमार से मुलाकात कर सीधा-सीधा आरोप लगाया कि डॉक्टरों के गलत इंजेक्शन और लापरवाही से बच्चे की मौत हो गई। अब दबाव बनाने के लिए हड़ताल पर चले गए हैं। इस दौरान परिजनों की ओर से तहरीर भी दी गई, जिसमें हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमे का अनुरोध किया गया।
खैर निवासी बच्चे की मां साजिया पत्नी अली मलिक की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि 2 माह का उसका बेटा अरहम मुस्तफा डायरिया की शिकायत पर 27 मई को भरती कराया गया था।
कोई डॉक्टर इलाज को नहीं आया। बल्कि जूनियर डॉक्टर ने गलत इंजेक्षन लगा दिया, जिससे रात में बच्चे की मौत हो गई। जब विरोध किया तो दंपति को बंधक बना लिया और सुबह हमें यह कहते हुए छोड़ा कि अब मिट्टी ले जाओ।
इसके बाद उल्टा हमारे खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मौत के लिए डॉ.जफर इकबाल, डॉ.अंबार, डॉ. मुनाजिश आदि स्टाफ व सीएमओ दोषी हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस पर एसएसपी ने मामले में जांच व उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।एसएसपी लव कुमार के अनुसार शिकायत आई है। दोनों पक्षों की जांच के बाद ही आगे कार्रवाई की जाएगी।