शनिवार देर रात धूल भरी तेज आंधी ने परेशान किया। चारों ओर धूल ही धूल फैल गई। रविवार सुबह से काले बादल छाये थे तेज हवा के बाद राहत की बारिश हुई। लगभग डेढ़ घंटे तक तेज बारिश ने किसानों के मन को खुश कर दिया।
धान की नर्सरी तैयार करने जा रहे किसानों को आशा और उम्मीद बंधी। बारिश बेहतर हुई तो गुजरे चार सीजन का दर्द शायद कुछ कम हो जाएगा। इधर, भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली तो शहर के कुछ इलाकों में जलभराव से थोड़ी टेंशन हुई। लेकिन संडे बारिश के कारण फन डे बन गया।
पिछले करीब चार सीजनों से मौसम की अठखेलियों ने अन्नदाता को खूब रुलाया है। कभी सूखा तो कभी बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि ने फसलों को इस कदर नुकसान पहुंचाया है कि किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच गये हैं।
इस वर्ष भी सर्दियों में रबी के सीजन में जनपद के दो ब्लाक खैर व गभाना में ओलावृष्टि से फसलें प्रभावित हुई थी। ऐसे में खरीफ के इस सीजन में जोरदार वर्षा का किसानों को बेसब्री से इंतजार है।
हालांकि मौसम विभाग द्वारा इस सीजन में जोरदार बारिश की भविष्यवाणी की है, लेकिन देरी से।
एक जून से लगने वाली धान की नर्सरी की चिंता रविवार को कुछ कम हुई है तो एक जुलाई से होने वाली धान की बुवाई के लिए भी किसान आशावान हो गये हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि बारिश कम हुई तो किसानों का दुख दर्द और बढ़ेगा।
गुजरे ग्यारह वर्षो में वर्षा के आंकड़े
-वर्ष 2005-जून-17.32 मिली, जुलाई-283.78 मिली, अगस्त-43.98 मिली
-वर्ष 2006-जून-37.08 मिली, जुलाई-154.28 मिली, अगस्त-23.94 मिली
-वर्ष 2007-जून-75.88 मिली, जुलाई-136.94 मिली, अगस्त-92.04 मिली
-वर्ष 2008-जून-124.14 मिली, जुलाई-70.32 मिली, अगस्त-165.56 मिली
-वर्ष 2009-जून-3.88 मिली, जुलाई-68.00 मिली, अगस्त-146.68 मिली
-वर्ष 2010-जून-7.14 मिली, जुलाई-143.5 मिली, अगस्त-168.32 मिली
-वर्ष 2011-जून-99.44 मिली, जुलाई-261.10 मिली, अगस्त-180.91 मिली
-वर्ष 2012-जून-8.84 मिली, जुलाई-128.0 मिली, अगस्त-255.72 मिली
-वर्ष 2013-जून-73.2 मिली, जुलाई-133.68 मिली, अगस्त-235.52 मिली
-वर्ष 2014-जून-26.12 मिली, जुलाई-97.90 मिली, अगस्त-33.00 मिली
-वर्ष 2015-जून-32.6 मिली, जुलाई-115.76 मिली, अगस्त-184.88 मिली
नोट : सभी आंकड़े जिला मुख्यालय से प्राप्त।
सामान्य वर्षा-जून-64.8 मिली, जुलाई-190 मिली, अगस्त-193.5 मिली