जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है। गुरुवार शाम तक मेडिकल में भर्ती तीन मरीजों का निधन हो गया है। पिछले चार दिनों में कुल दस मरीजों की मौत हो चुकी है।
गंभीर बीमारी एवं घायल मरीजों को लेकर दूर-दूर से पहुंच रहे तीमारदार रोते हुए प्राइवेट अस्पतालों की तरफ भाग रहे है। पिछले चार दिनों से मेडिकल में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। इमरजेंसी में सन्नाटा पसरा है।
एचआईवी से पीड़ित ग्रामीण क्षेत्र के एक छह वर्षीय मरीज का वृहस्पतिवार को निधन हो गया। क्वार्सी के गली नंबर 12 के 72 वर्षीय गुलाकी खान का वृहस्पतिवार को निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थे।
इसके साथ ही हाथरस जंक्शन निवासी सूरजमुखी का आज निधन हुआ। वे 28 नवंबर से वार्ड में भर्ती थी। इसके अतिरिक्त चार दिवसीय हड़ताल के दौरान मेडिकल में भर्ती करीब 10 मरीजाें से अधिक की मृत्यु हो चुकी है।
हालांकि सीएमओ डॉ. एहतेशाम का कहना है कि इन मौतों को हड़ताल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वृहस्पतिवार को सुबह में कासगंज से एक बेहद गंभीर मरीज को लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे।
हड़ताल देखकर वे लोग रोते हुए मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल में चले गए। इसके अतिरिक्त अन्य कई मरीजों को भी हड़ताल के कारण वापस जाना पड़ा।
रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। पिछले चार दिन से अस्पताल में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
मुश्किल से 12-14 कंसलटेंट ओपीडी में बैठ रहे है और वहीं से दवा लिखकर मरीजों को वापस भेज रहे है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में न तो भर्ती किया जा रहा है और न ही ऑपरेशन आदि का काम हो रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ 12-14 कंसलटेंट के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं नहीं चल सकती। भर्ती एवं ऑपरेशन आदि की स्थिति में पूरी टीम की जरूरत होती है। पहले से वार्ड में भर्ती मरीजों को कंसलटेंट जरूर देख रहे है।
इसके अतिरिक्त आईसीयू, सीसीयू एवं सीपीडब्लू आदि में डॉक्टरों की ड्यूटी लगी हुुई है। जानकारों की माने तो मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट एवं इंटर्नशिप मिलाकर करीब सवा छह सौ डॉक्टर है और स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।