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Shatru Sampatti: शत्रु संपत्ति पर खड़े हो गए बाजार, अफसर खेल रहे ये जिम्मेदार-वो जिम्मेदार

Wed, 12 Feb 2025 05:15 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एसडीएम कोल ने तहसीलदार कोल से शत्रु संपत्तियों की जांच कराई, जिसमें खुलासा हुआ कि इन शत्रु संपत्तियों पर आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। यह संपत्तियां नगर निगम के क्षेत्राधिकार में हैं। 
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अलीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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शस्त्रु संपत्तियों पर कब्जे कर लिए गए हैं। शासन के आदेश पर कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। इस संपत्ति पर कहीं मकान बने पाए गए तो कहीं पूरा बाजार मिला है। अब जब जिम्मेदारी तय करने की बात आई तो विभाग एक दूसरे को पत्र भेजकर ये जिम्मेदार वो जिम्मेदार खेल रहे हैं। राजस्व विभाग और नगर निगम एक दूसरे को पांच से ज्यादा पत्र भेज चुके हैं। लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया है लापरवाही किसकी रही।

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अलीगढ़ ले में 45 शत्रु संपत्तियां हैं। कोल तहसील क्षेत्र में 17 शत्रु संपत्तियां हैं, जिनका क्षेत्रफल 22.5930 हेक्टेयर है। 10 शत्रु संपत्तियां बेशकीमती हैं, जो सिविल लाइन, पिलखना, हरदुआगंज, दोदपुर, भमोला माफी, सराय बैरागी, घुड़ियाबाग क्षेत्र में हैं। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एसडीएम कोल ने तहसीलदार कोल से इन संपत्तियों की जांच कराई, जिसमें खुलासा हुआ कि इन शत्रु संपत्तियों पर आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। यह संपत्तियां नगर निगम के क्षेत्राधिकार में हैं। 

एसडीएम ने 19 दिसंबर 2024 को सहायक नगर आयुक्त को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा दिया। इस पर 20 जनवरी 2025 को सहायक नगर आयुक्त ने जिलाधिकारी को जवाब दिया कि शत्रु संपत्ति का कोई रिकॉर्ड नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है इसलिए इन संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराने का अधिकार एसडीएम का है। इन दोनों विभागों की तरफ से लगातार ऐसे पत्र जारी हो रहे हैं। लेकिन समाधान नहीं निकल रहा। राजस्व विभाग नगर निगम को जिम्मेदार मान रहा है जबकि नगर निगम राजस्व विभाग को। हालांकि 30 जनवरी को एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने एसडीएम कोल को शत्रु संपत्तियों की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक मामला ठंडे बस्ते में है।

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अफसरों की मिलीभगत से हुए कब्जे

जिले में भूमाफिया सिस्टम पर हावी दिखाई देते हैं। यही कारण है कि तमाम शिकायतों के बाद भी तहसील और नगर निगम के अधिकारी सरकारी जमीन तथा शत्रु संपत्तियों को कब्जों से मुक्त नहीं करा पा रहे हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि नगर निगम और तहसील के अधिकारी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है। इसी के चलते शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा और विभागों में फाइलों के अंबार लगे हैं। यह भी साफ है कि अफसरों की मिलीभगत से ही जमीनों पर कब्जे हुए हैं।

सीएम के आदेश के बाद खंगाली जा रहीं फाइलें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि शत्रु संपत्तियों का उपयोग गोशाला तथा सामाजिक कार्यों के लिए किया जाए। इसके बाद तहसीलों में शत्रु संपत्तियों की फाइलें खंगाली जा रही हैं। जिले की खैर तहसील में 27, कोल तहसील में 17 और गभाना तहसील में एक शत्रु संपत्ति है। मंंगलवार को भी तहसीलों के कर्मचारी शत्रु संपत्तियों की फाइलें खंगालने में लगे रहे।
शत्रु संपत्ति के स्वरूप को नहीं बदला जा सकता। इस तरह की शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।- संजीव रंजन, जिलाधिकारी
शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जों को लेकर मंगलवार को डीएम से मुलाकात की है। डीएम ने एसडीएम कोल से जांच कराकर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।- पंडित केशव देव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भ्रष्टाचार विरोधी सेना
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